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अमेरिका के फंड रोकने से WHO चीफ के माथे पर पड़ा बल, हो रहे नुकसान का कर रहे आकलन, मांगेंगे दूसरे देशों से मदद

अमेरिका द्वारा फंड रोकने के बाद डब्ल्यूएचओ की हालत खराब हो गई है क्योंकि विश्वशक्ति हर साल उसे 40 करोड़ डॉलर का फंड देता है और अब यह संगठन हो रहे नुकसानों का आकलन कर रही है
हाइलाइट्स:
कोरोना वायरस को लेकर डब्ल्यूएचओ की तैयारियों से नाखुश अमेरिका ने फंड पर रोक लगा दी है
अमेरिका के इस कदम से डब्ल्यूएचओ चीफ घबरा गए हैं और उन्होंने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है
उन्होंने कहा कि वह अब दूसरे साझीदारों से बात करेंगे और फंड की कमी को पूरा करेंगे
अभी यह तय नहीं है कि कौन-कौन से देश इस वित्तीय गैप को पूरा करने के लिए तैयार हुए हैं
जिनेवा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोरोना संकट से निपटने में गैर जिम्मेदार तरीके से काम करने का आरोप लगाकार डब्ल्यूएचओ को दी जा रही फंड पर रोक लगा दी। जिसने डब्ल्यूएचओ को अपने मिशन पर इसके होने वाले असर की समीक्षा करने को मजबूर कर दिया है। अमेरिका के इस बड़े फैसले से डब्ल्यूएचओ चीफ के माथे पर बल पड़ गया है और अब कोरोना संकट के बीच वित्तीय कमी को पूरा करने के लिए दूसरे सहयोगियों से और अधिक फंड मांगने पड़ रहे हैं। ।
डब्ल्यूएचओ डायरेक्टर जनरल टैडरोस ऐडरेनॉम गैबरेयेसस ने कहा, ‘डब्ल्यूएचओ इस बात की समीक्षा कर रहा है कि अमेरिका की तरफ से फंडिंग वापस लेने पर हमारे काम पर किस तरह का असर होता है और हम वित्तीय कमी को पूरा करने के लिए हमारे साझीदारों के साथ काम करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारा काम बिना बाधा के जारी रहे। उल्लेखनीय है कि ट्रंप की धमकी के बाद गैबरेयेसस ने कहा था कि जब दुनिया कोरोना महामारी से लड़ रही है तो ऐसे समय में फंड वापस लेने का फैसला करना उचित नहीं है। घबराए डब्ल्यूएचओ चीफ ने अमेरिका से अपील की थी कि उसे इस वक्त चीन के साथ मिलकर काम करना चाहिए।
ट्रंप को आया गुस्सा, दे डाली धमकी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को शुरुआत में ऐसे लगा कि कोरोना वायरस से आसानी से निपटा जा सकता है लेकिन उन्हें इस बात का अहसास नहीं था कि यह वायरस उनके देश की बड़ी आबादी को अपनी चपेट में ले लेगा। यहां कोरोना से अब तक 26 हजार लोगों की मौत हो गई है और 6 लाख से ज्यादा लोग इसके संक्रमित हैं ऐसे में ट्रंप का गुस्सा पहले चीन पर उतरा और फिर डब्ल्यूएचओ पर। उन्होंने चीन पर कोरोना को लेकर सच्चाई छुपाने के आरोप लगाए और डब्ल्यूएचओ पर निशाना साधते हुए कहा कि इसने मामले में चीन का पक्ष लिया और हमें गलत सलाह दी। ट्रंप ने कहा कि हमने भाग्यवश यह सलाह नहीं मांगी और चीन के लिए ट्रैवल बैन लगा दिया था।
कुछ दिन पहले ट्रंप ने वाइट हाउस में संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘हम डब्ल्यूएचओ पर खर्च की जाने वाली राशि पर रोक लगाने जा रहे हैं। हम इस पर बहुत प्रभावशाली रोक लगाने जा रहे हैं। अगर यह काम करता है तो बहुत अच्छी बात होती। लेकिन जब वे हर कदम को गलत कहते हैं तो यह अच्छा नहीं है।’
WHO is reviewing the impact on our work of any withdrawal of US funding and will work with our partners to fill any financial gaps we face and to ensure our work continues uninterrupted: Tedros Adhanom Ghebreyesus, Director-General of WHO (World Health Organization) pic.twitter.com/ntajiYlZNl
— ANI (@ANI) April 15, 2020

आखिरकार कर दिया बड़ा ऐलान
ट्रंप ने धमकी दी थी तो शायद ऐसा लग रहा था कि अमेरिका फंड में कटौती करेगा, लेकिन किसी को यह उम्मीद नहीं थी कि वह फंड पर पूरी तरह से रोक लगा देगा। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, ‘जब तक कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने और इससे निपटने में गंभीर कुप्रबंधन और इसे छुपाने में वैश्विक संस्था की भूमिका का आकलन करने के लिए समीक्षा की जा रही है तब तक आज मैं अपने प्रशासन को डब्‍ल्‍यूएचओ के वित्त पोषण को रोकने का निर्देश दे रहा हूं। हर कोई जानता है कि वहां क्या हुआ है।’ ट्रंप प्रशासन ने डब्ल्यूएचओ पर चीन की तरफदारी करने का आरोप लगाया है जिसकी वजह से अमेरिका की अर्थव्यवस्था में ठहराव आ गया है।
डब्ल्यूएचओ को इतनी बड़ी रकम देता रहा है अमेरिका
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि हमारे देश के टैक्स पेयर्स डब्ल्यूएचओ को सालाना 40 से 50 करोड़ डॉलर देते हैं जबकि चीन सालाना तकरीबन 4 करोड़ डॉलर या उससे भी कम राशि देता है। ट्रंप ने कहा कि कोरोना के प्रकोप में अपना कर्तव्य निभाने में डब्ल्यूएचओ पूरी तरह नाकाम हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन में जब यह वायरस फैला तो संयुक्त राष्ट्र की संस्था ने उसे छुपाने की कोशिश की और इसके लिए उसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

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