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एडीओ पंचायत की मनमानी के चलते नहीं बन सके इज्जत घर-उत्तर प्रदेश

एडीओ पंचायत की मनमानी के चलते नहीं बन सके इज्जत घर ओडीएफ यानी खुले में शौच मुक्त नहीं हो सकी ग्राम पंचायतें स्वच्छ भारत मिशन के तहत जहां सरकार बड़ी मात्रा में इज्जत घर का निर्माण करवाकर ग्राम पंचायतों को ओडीएफ यानी खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए संकल्पित है वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के मनमानी के चलते सरकार के मंसूबों पर पानी फिरता नजर आ रहा है केंद्र सरकार द्वारा तथा राज्य सरकार द्वारा सख्त निर्देश जारी किए गए थे कि 2 अक्टूबर 2018 तक सभी ग्राम पंचायतों को ओडीएफ बनाया जाना था लेकिन ग्राम पंचायत प्रधानों व सचिवों सहित जिम्मेदार पद पर बैठे आला अफसरों की घोर लापरवाही के चलते ग्राम पंचायतें आज तक ओडीएफ नहीं हो सकी है ओडीएफ बनाए जाने के लिए कागजी घोड़े तो खूब दौड़ आए गए लेकिन जमीनी हकीकत कोसों दूर नजर आ रही है मामला है विकासखंड शंकरगढ़ और विकासखंड जसरा जनपद प्रयागराज उत्तर प्रदेश चौंकिए मत यह हकीकत है कि दोनों ब्लाकों में तैनात एडीओ पंचायत ओम प्रकाश पांडे की देखरेख में कई ग्राम पंचायतों में इज्जत घरों का निर्माण कार्य करवाया गया है लेकिन हकीकत इससे अलग है जिन इज्जत घरों को बनवाया गया है वह भी आधे अधूरे पड़े हैं और जो बने भी हैं वह इस्तेमाल करने के लायक नहीं है अधिकतर ग्राम पंचायतों में निर्मल भारत अभियान के तहत बनवाए गए शौचालयों की लीपापोती करके सिर्फ बानगी के रूप में कोटा पूरा करने की कोशिश की गई है इज्जत घर के नाम पर खाली चहारदीवारी बना दी गई है लेकिन गड्ढे मानक के अनुसार नहीं बनाए गए एडीओ पंचायत ओम प्रकाश पांडे की मनमानी इस कदर हावी है कि शौचालयों के निर्माण में खानापूर्ति वा धांधली करने वाले सचिव व सूबे की सरकार द्वारा तीसरी सरकार के मुखिया के ऊपर कार्यवाही करने से कतराते हैं विकास कार्य के नाम पर सिर्फ और सिर्फ कमीशन खोरी के चलते सचिव और प्रधान की मिलीभगत के चलते एडीओ पंचायत को मोटी रकम देकर उनकी जेबें गर्म कर देते हैं फिर शुरू होता है धुंधली का काम जो इज्जत घर बनाए भी गए हैं उसमें मानक के अनुसार ईट मैटेरियल और सीमेंट ना लगाने से समय अवधि से पहले ही ध्वस्त हो जा रहे हैं सूत्रों के अनुसार पता चलता है कि एडीओ पंचायत ओम प्रकाश पांडे की मनमानी तरीके से सरकारी पैसे का बंदरबांट किया जाता है जब भी इज्जत घरों की शिकायतें ग्राम पंचायतों से आती है तो एडीओ पंचायत जांच के नाम पर सिर्फ और सिर्फ लीपापोती करते हुए नजर आते हैं मजे की बात यह है की इज्जत घरों के निर्माण कार्य इस प्रकार करवाए गए हैं कि एक भी बरसात का सामना करने लायक नहीं है पहली ही बरसात में हकीकत सामने नजर आ जाएगी सूबे की सरकार द्वारा तीसरी सरकार के मुखिया व सचिवों की मनमानी व विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के चलते सरकारी धन का बंदरबांट किया गया है विकास कार्य करवाने की जिम्मेदारी सूबे की सरकार द्वारा जिस तीसरी सरकार के मातहतों को सौंपी गई उसमें से कुछ मातहतों के द्वारा विकास कार्य करवाने में घोर लापरवाही बरती गई है पानी की तरह बहाए गए पैसे फिर भी नहीं बदली गांव की सूरत सरकारी धन का हो रहा है दुरुपयोग खुली विकास कार्यो की पोल सूबे की सरकार द्वारा तीसरी सरकार की प्रासंगिकता पर प्रश्न चिन्ह यही वजह है कि विकास कार्य आधा अधूरा है इसका रियलिटी चेक किया हमारी टीम ने चौंकिए मत यह हकीकत है सोचने वाली बात यह है कि सरकार के निर्देशों का खुला उल्लंघन करने वाले सहायक विकास अधिकारी पंचायत व सचिवों व ग्राम प्रधानों के ऊपर जिला प्रशासन क्या उचित कार्यवाही करने का काम करेगा यह एक यक्ष प्रश्न है ब्यूरो रिपोर्ट प्रयागराज

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