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कर्ज के दलदल में डूबे एक सरपंच परिवार की कहानी-धौलपुर

कर्ज के दलदल में डूबे एक सरपंच परिवार की कहानी

कहानी में अपने खाने के लिए मोहताज हो गया है यह सरपंच परिवार

राजस्थान के धौलपुर जिले में बीते 5 वर्षों में सरपंचों की क्या कहानी स्थिति रही आज हम जिले के एक सरपंच परिवार की स्थिति लेकर बता रहे हैं।

इस तरह की कहानी की खबर में खबर दिखाने का हमारा मकसद किसी से कोई जातीय दुश्मनी के चलते किसी की छवि को खराब करनां ही नहीं और नां ही हमारा मकसद किसी की छवि को खराब कर मानसिक भावना को ठेस पहुंचाना है बल्कि एक छिपी सच्चाई को उजागर करना है।

जो आज इस परिवार की हो रही है।

खबर में कहानी धौलपुर जिले के भरकूंजरा ग्राम पंचायत में बीते 5 वर्ष सरपंच रहे ओमबती पत्नी ओमबरन जाटव सरपंच निवासी तिलऊआ परिवार की है।

यूं तो सरपंचों की ग्राम पंचायत विकास कार्य में ग्राम विकास की कहानी एक अच्छी ही होती है लेकिन इस सरपंच परिवार की कहानी तो इन सरपंच परिवारों से कुछ अलग ही दिखती नजर आ रही है।

इसे एक संयोग की बात मानें या सरपंच परिवार की किस्मत।

खैर जो भी।

खबर कहानी के चलते बता दें कि सरपंच ओमवती के पति तीन भाई।

जिसमें बड़ा अतर सिंह (अतरी) जिसकी पत्नी सुशीला सरपंच ओमवती के साथ- साथ गांव की उपसरपंच और और वार्ड की वार्ड पंच रही।

ये एक बड़े और अच्छे एक संयोग की बात रही कि घर में दोनों दौरानी और जिठानी सरपंच और उपसरपंच वार्ड पंच बनी।

इनको गांव ग्राम पंचायत का सरपंच उप सरपंच और वार्ड पंच बनाने में इनके गांव तिलऊआ के लोगों का भरपूर सहयोग रहा।

सहयोग में लोगों ने सरपंच परिवार का चुनाव में एक रुपया भी खर्च नहीं होने दिया बल्कि खुद अपनी जेब से गांव के लोगों ने पैंसा खर्च कर इनको गांव का सरपंच बनाकर गांव और ग्राम पंचायत भरकूंजरा का सरपंच और उपसरपंच पद की कमांन सौंपी।

एक यह सोच कर कि यह लोग हमारी ग्राम पंचायत का अच्छा ग्राम विकास कर एक सुंदर ग्राम पंचायत बनाएंगे।

लेकिन इस सरपंच परिवार ने सरपंच और उपसरपंच ने पंचायत विकास तो क्या किया अपनी परिवार की हालत को आज माली हालत बना लिया।

हालत के चलते बता दें तो आज इस सरपंच परिवार के लोगों की हालत यह हो गई है कि रोजाना इनके घर पर आकर रुपये- पैंसे का तकादा करने वाले लोग रोजाना द्वार पर खड़े होकर अपना रुपया पैंसा मांगकर देहरी की धूल दे रहे हैं।

इसके पीछे सरपंच परिवारों के लोगों के साथ सरपंच और उपसरपंच सुशीला का एक सीधा स्वभाव और एक ज्यादा पढ़ा- लिखा नहीं होना होना बताया जा रहा है।

वहीं परिवार की महिला और उप सरपंच पति छोटे भाई ओमबरन पत्नी सरपंच ओमवती जाटव की मानें तो इस माली गरीब हालत के पीछे सरकार से बीते डेढ़ साल से पंचायत में कराए गए विकास कार्य का एक भी रुपया उनके पास नहीं आना और आया जो ऊपर वाले के साथ खा डकार गए पंचायत में काम कराने वाले ठेकेदार लोग विकास कार्य में एक नाम मांत्र का पैंसा लगाकर।

पंचायत में कराए गए ग्राम विकास कार्य में ठेकेदार लोगों ने कितना पंचायत का विकास कराया यह तो विकास कार्य को देखने से ही पता चलता है।

जैसी सरपंच और उसके परिवार के लोगों से मिली और बताई गई एक गोपनीय जानकारी के अनुसार।

और तकादा तो इस बात का हो रहा है कि पंचायत विकास कार्य में इधर- उधर से रुपया पैंसा ले देकर के साथ लेबर और उधार सामान लेकर ग्राम पंचायत का विकास कार्य जो कराया है बीते ढेड़ साल के भीतर।

माली गरीब हालत के चलते आज यह सरपंच और उपसरंच परिवार अपने खाने के लिए मोहताज हो गया।

गांव के लोगों का इस परिवार को सरपंच उपसरपंच पद कराने में इतना सहयोग रहा कि जीवन भर गांव के लोगों का यह परिवार एहसान नहीं चुका सकता।

सहयोग करने वाले गांव के कुछ लोगों की मानें तो।

आखिर कौन है यह सरपंच परिवार और कहां का रहने वाला है।

भरकूंजरा ग्राम पंचायत के गांव तिलऊआ गांव में रहने वाला आज यह सरपंच परिवार जिले की बसेड़ी पंचायत समिति के गांव में नहचोली का रहने वाला है जो बीते कई वर्षों से बहिन की ससुराल गांव तिलऊआ में मिली एक पहाड़ी जमीन पर अपना आशियाना बना कर आज अपना जीवन व्यतीत कर रहा है।

5 वर्ष के ग्राम पंचायत कार्यकाल में सरपंच ओमबत्ती जाटव पर लगे विरोधियों के कई केस।

जिसमें फर्जी अंकतालिका से चुनाव जीतना ही नहीं बल्कि दो से अधिक बच्चों का भी केस लगा साथ ही पंचायत सेक्रेटरी द्वारा फर्जी मस्टररोल से राशि उठाने का भी।

बचाव में सरपंच और सरपंच परिवार का लाखों रुपया खर्च हो गया।

लाख रुपया खर्च होने से कर्ज के दलदल में भी डूबना सबसे ज्यादा बताया जा रहा है।

जब से इस परिवार ने सरपंची और उपसरपंची का भार संभाला लेकिन एक डर और खौफ के साए में जीकर।

जैसा गांव के लोगों और परिवार के लोगों से मिली और बताई एक जानकारी के अनुसार।

सबसे ज्यादा केस के चलते मुसीबत में तो यह परिवार जब पड़ गया था तब इनके ऊपर पंचायत चुनाव हारे एक प्रत्याशी ने इनके ऊपर दो से अधिक बच्चों का केस लगा दिया था।

मांनों तो एक तरह से इनके ऊपर दुखों का पहाड़ सा टूट पड़ा था।

खबर के चलते आज आपको बता दें कि इस परिवार की माली गरीब हालत इतनी हो गई है कि बीते दिनों हाल ही में गांव में बहन के यहां अपनी बहन की बेटी की शादी में इस परिवार ने भात की रस्में निभाई थी वह भी अपनी एक सोने की जंजीर किसी के यहां ₹12000 में गिरवी रखकर भात को भरते हुए बहिन के यहां भात की रस्म को पूरा किया था।

वही कर्ज के दलदल में डूबे इस सरपंच परिवार की अभी बीते कुछ दिनों पहले ही पास के ही गांव के एक गुर्जर जाति के व्यक्ति ने अपने ₹4000 के पीछे ट्रैक्टर की ट्रॉली को खींच लिया था लेकिन गांव के लोगों ने समझा-बुझाकर ट्रौली को वापस ले लिया।

कर्ज़ के दलदल में डूबे इस सरपंच परिवार का एक ट्रैक्टर तो पहले ही करीब एक साल पहले कर्ज के चलते बिक चुका है।

अब रहा यह दूसरा मैंसी ट्रैक्टर डीआई 1035 सो इसे भी कर्जदार अपने कर्ज में खींचने का प्लान बना रहे हैं।

एक तरफ से सरपंच परिवार के ऊपर अच्छा संयोग का बनना कि सरपंच उपसरपंच और वार्ड पंच का पद मिला। तो वहीं दूसरी कर्ज का दलदल डूबना जिसमें सरपंच परिवार अपने खाने के आज मोहताज हो गया। 

इसे क्या कहें।

ये कहा नहीं जा सकता।

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