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कागजों में 2967 बाघ जबकि वास्तविकता में 2 हजार भी नहीं भीलवाड़ा

देेश में 414 बाघों का शिकार व मौत चिंताजनक

कागजों में 2967 बाघ जबकि वास्तविकता में 2 हजार भी नहीं

भीलवाड़ा – मूलचन्द पेसवानी 

देश मंे टाईगर प्रोजेक्टों मंे शिकार व मौत से घट रही बाघों की संख्या को चिंताजनक बताते हुए पीपुल फाॅर एनीमल्स के प्रदेश प्रभारी बाबूलाल जाजू ने कहा कि सरकार के प्रमाणित आंकड़ो मंे 50 टाईगर रिजर्व मंे 2967 बाघ बताये जा रहे हैं, जो भ्रामक है। बाघों को बचाने व बढ़ाने के नाम पर हजारों करोड़ रूपया खर्च किये जाने के बावजूद राजस्थान के रणथंभोर राष्ट्रीय पार्क मंे बताये जा रहे बाघों मंे वर्ष 2017 तक 26 बाघ लापता बताये जा रहे हैं जबकि ज्यादातर बाघ शिकार की भेंट चढ़ चुके हैं। 

प्रदेश प्रभारी जाजू ने रविवार को भीलवाड़ा में बताया कि रणथंभोर जैसे ही हालात अन्य बाघों के आवास राष्ट्रीय पार्कों के हैं। जाजू ने सरकार द्वारा बताये जा रहे 2967 बाघों की संख्या को भ्रामक बताते हुए वास्तविक बाघों की संख्या 2000 से भी कम होने का दावा किया है।

जाजू ने पिछले 4 वर्षों मंे 414 बाघों की मौत जिसमंे 2019 में 84, 2018 मंे 93, 2017 में 115 व 2016 मंे 122 बाघों की मौत व शिकार के मामले मंे टाईगर प्रोजेक्ट के चेयरमैन नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर बाघों की सुरक्षा कड़ी करने व गैर जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी व लापरवाही के कारण हो रही शिकार की घटनाआंे पर लगाम लगाने की मांग की है। जाजू ने आगे कहा कि बाघों का शिकार, बाघों की खाल, हड्डियां, नाखून, बाल व उनके अंगो को महंगे दामांे में अंतर्राष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों को बेचकर धन कमाने की लालसा के चलते किया जा रहा है।

जाजू ने प्रधानमंत्री व टाईगर प्रोजेक्ट के चेयरमैन नरेन्द्र मोदी को पत्र भेजकर देश मंे टाईगर रिजर्व की संख्या बढ़ाने व इनकी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने व टाईगर प्रोजेक्टों में बसे गांवो को अन्यत्र सुव्यवस्थित विस्थापित करने की मांग की है। जाजू ने बताया कि पूर्व मंे देश मंे टाईगर रिजर्व क्षेत्रों मंे 64951 परिवार निवासरत थे जिसमंे से कुछेक परिवारों को ही विस्थापित किया है। टाईगर प्रोजेक्टों में इंसानी बस्तियांे के चलते शिकार की घटनाओं को अंजाम दिया जाता है।

उल्लेखनीय है कि आजादी के समय देश मंे 40 हजार बाघ अपनी उपस्थिति दर्ज कराते थे, वहां बाघों की संख्या हजारांे करोड़ रूपया संरक्षण पर खर्च करने के बावजूद नाममात्र की रह गई है जो अत्यधिक चिंतनीय है।

पीएफए ने 85 मोरों सहित 115 पक्षियांे की हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई

भीलवाड़ा। पीपुल फाॅर एनीमल्स के प्रदेश प्रभारी बाबूलाल जाजू ने नागौर जिले की डेगाना तहसील के मीठड़िया मंे गुर्जरों की ढाणी के पास 85 मोरों व 30 कमेड़ी सहित अन्य पक्षियों की हत्या की प्राथमिकी पुलिस अधीक्षक नागौर को ई-मेल एवं रजिस्टर्ड डाक से दर्ज कराते हुए मोरों के शिकारियांे को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही करने की मांग की है। जाजू ने बताया कि मोर प्रथम अनुसूची का पक्षी होकर इसकी हत्या वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 का खुला उल्लंघन होकर दण्डनीय व गैर जमानती अपराध है।

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