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कोरोना वायरस के इलाज के लिए पहली खाने वाली दवा को मिली मंजूरी, कीमत 103 रुपये प्रति टैबलेट होगी

कोरोना वायरस के इलाज के लिए पहली खाने वाली दवा को मिली मंजूरी, कीमत 103 रुपये प्रति टैबलेट होगी

कंपनी के चेयरमैन ग्लेन सल्दान्हा ने कहा कि ये कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों से स्वास्थ्य सेवाओं पर दवाब बढ़ रहा है. ये दवा उसे कम करने में मदद करेगी.

मुंबई: देश में कोरोना वायरस के मामले बढ़ रहे हैं. अब तक 395048 पॉजिटिव मामले सामने आ चुके हैं. दुनियाभर में इस वायरस के दवा और वैक्सीन पर रिसर्च जारी है. इस बीच महाराष्ट्र स्थित ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स ने इस वायरस से इलाज के लिए दवा लॉन्च की है. कंपनी ने शनिवार को एक बयान में इसकी जानकारी दी. इसकी कीमत 103 रुपये प्रति टैबलेट होगी.

कोरोना के इलाज में ये पहली खाने वाली दवा

इससे पहले शुक्रवार को कंपनी ने इस बात की जानकारी दी थी कि उसे सरकार की तरफ से एंटीवायरल दवा फैबिफ्लू के मार्केटिंग और मैन्यूफैक्चरिंग का अप्रूवल मिल गया. कंपनी ने शुक्रवार को कहा था कि उसे भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीजीसीआई) से इस दवा के विनिर्माण और विपणन की अनुमति मिल गई. कंपनी ने कहा कि फैबिफ्लू कोविड-19 के इलाज के लिए पहली खाने वाली फेविपिराविर दवा है, जिसे मंजूरी मिली है.

कंपनी के चेयरमैन का बयान

ग्लेमार्क फार्मास्युटिल्स के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक ग्लेन सल्दान्हा ने कहा, ‘‘यह मंजूरी ऐसे समय मिली है जबकि भारत में कोरोना वायरस के मामले पहले की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहो हैं. इससे हमारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली काफी दबाव में है.’’ उन्होंने उम्मीद जताई कि फैबिफ्लू जैसे प्रभावी इलाज की उपलब्धता से इस दबाव को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी.

गौरतलब है कि कोरोना के इलाज के दौरान इससे पहले रेमडेसिविर और दूसरी दवाइयों का इस्तेमाल किया गया. लेकिन फैबिफ्लू पहली ऐसी दवा है जिसे खाया जा सकेगा. रेमडेसिविर के अलावा डेक्सामेथासोन नाम की दवा के भी कुछ अच्छे नतीजे सामने आए थे. डेक्सामेथासोन एक तरह का स्टेरेयॉड है. ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्च में इस दवा के कुछ अच्छे नतीजे सामने आए थे.

अब फैबिफ्लू दवा को मंजूरी मिल गई है. अब देखना होगा कि ये दवा कोरोना संकट में किस तरह से मदद कर पाती है? अगर ये दवा वायरस से लड़ने में मददगार साबित होती है तो कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जल्द सफलता मिलने की उम्मीद जगेगी.

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