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कोरोना वायरस के बचाव के लिए नवग्रह आश्रम में किया आयुर्वेद काढ़े का छिड़काव-भीलवाडा

कोरोना वायरस के बचाव के लिए नवग्रह आश्रम में किया आयुर्वेद काढ़े का छिड़काव

औषधीय पौधों के स्वरस हल्दी मिश्रित गौमूत्र को लेने से कोरोना वायरस का संभव है उपचार

नवग्रह आश्रम में कोरोना आयुर्वेद काढ़ा का निशुल्क वितरण प्रांरभ  

शाहपुरा- मूलचन्द पेसवानी 

दुनिया भर के लिए महामारी बन चुका कोरोना वायरस के प्रदेश व देश में भी फैलने की सूचना के बाद भीलवाड़ा जिले में आयुर्वेद के क्षेत्र में काम कर रहे श्री नवग्रह आश्रम सेवा संस्थान ने शनिवार को अपने परिसर में आयुर्वेद काढ़ा तैयार कर उससे छिड़काव कर बचाव का नवाचार किया है। आश्रम संस्थापक हंसराज चोधरी के अनुसार देश व दुनियां से आने वाले रोगियों को देखते हुए आश्रम की ओर से बचाव के लिए तैयार किये गये काढ़े का यहां छिड़काव किया है तथा काढ़ा तैयार कर प्रत्येक आने वाले व्यक्ति को पिलाया जा रहा है ताकि उसके बचाव की गारंटी तो तय हो सके।

चोधरी ने बताया कि आश्रम की रिसर्च टीम द्वारा तैयार किये गये इस छिड़काव काढ़े में सभी आवश्यक आयुर्वेद ओषधियों को मिश्रित किया गया है। 

आश्रम के संस्थापक हंसराज चोधरी ने इस काढ़े व छिड़काव से कोरोना वायरस बचाव करने का दावा करते हुए कहा बताये अनुसार स्वरस लेने से निदान संभव है। व्यक्ति को अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाये रखने के साथ आत्मविश्वास को बनाये रखना होगा।

नवग्रह आश्रम के संस्थापक हंसराज चोधरी ने बताया कि यह एक विषाणु मात्र है जिसका उपचार आयुर्वेद के माध्यम से संभव है। चरक पंरपरा में युगों से आयुर्वेद महामारी का उपचार करता रहा है। उन्होंने बताया कि ज्यादा खांसी होना, जुकाम व छींक आना, श्वांस लेने में परेशानी का आना, गले में खरास होना इसके लक्षण है। इसके बचाव के लिए अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाये रखनी होती है। उपचार के लिए औषधीय पौधों का स्वरस बनाकर उसे 6-6 घंटे के अंतराल से रोगी को लेना अनिवार्य है। इसके साथ देशी गाय का 35 मिली गौमूत्र व 5 ग्राम देशी कुट कर पीसी हुई हल्दी का मिश्रण भी दिन में 4 बार लेना अनिवार्य है। स्वरस में नीम गिलोय के 5 पत्ते, नीम के 20 पत्ते, पीपल के 3 पत्ते, गुल्लर के 5 पत्ते, गुडहल के फूल 5, कचनार के 5 पत्ते, वासा के 5 पत्ते, श्याम तुलसी के 9 पत्ते लेकर मिक्सी में उसको ग्रांइड करके उसमें मनवाछिंत फलों का रस मिलाकर 6-6 घंटे के अंतराल से स्वरस का रोगी को सेवन कराया जाना अनिवार्य है। कोरोना वायरस से बचाव के लिए कोई भी व्यक्ति भी इसका सेवन कर सकता है। 

चोधरी ने बताया कि ये औषधीय पौधे नवग्रह आश्रम में उपलब्ध है। कोई भी व्यक्ति स्वरस बनाने के लिए इनके पतते निशुल्क प्राप्त कर सकता है। बचाव के लिए रोगी को मास्क पहनना व कोरोना वायरस के रोगी से दूर रहना अनिवार्य है। किसी भी चिन्हित रोगी के संपर्क में नहीं आना चाहिए। 

चोधरी ने बताया कि केंसर रोगी के उपचार में दिये जाने वाला रक्तशोधन मिश्रण भी कोरोना वायरस से पीडित रोगी ले सकता है। दिन में तीन बार काढ़ा बनाकर इसका सेवन करने से भी वायरस से छुटकारा मिल सकता है। चोधरी ने सोशल मीडिया के माध्यम से आम अवाम से अपील की है दुनिया में इस वायरस को लेकर हौवे के बजाय आयुर्वेद उपचार व बचाव के तरीको को अपना कर सहयोग करें।

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