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गांवों में तारबंदी से पनप रहे हैं नित नए रास्तों के विवाद

– एक दूसरे द्वारा बंद किए जा रहे हैं खेतों के रास्ते
– कानूनन किसी भी खेत का रास्ता कोई नहीं रोक सकता
– पटवारी,सचिव,सरपंच,प्रशासन गंभीरता से ले ऐसे मसलों को
– ऐसी ही समस्याएं एक दिन गांवों में खून खराबे को जन्म देती है
– सामूहिक कार्बन सामूहिक सरकारी तारबंदी योजना का नहीं ले रहे हैं लाभ
आजकल गांव में किसानों के बीच तारबंदी को लेकर भी नए नए खेतों रास्तों के विवाद पैदा हो रहे हैं । जानवरों से खेती-बाड़ी को बचाने के लिए आजकल किसानों द्वारा अपने खेतों के चारों तरफ तारबंदी करना आम बात हो रही है । इस तरह की तारबंदी के लिए सरकारी योजनाएं भी है । तारबंदी लेकर कई गांवों में रास्तों के विवाद सामने आ रहे हैं । जिन लोगों के खेत मुख्य रास्तों के किनारे हैं उनके पूरी तरह तारबंदी कर दिए जाने से ,,,रास्ते से दूर खेतों के किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है । यह समस्या कोई एक गांव की नहीं है । लगभग हर गांव में ऐसी समस्याएं आम है । इन समस्याओं को या तो गांव स्तर पर ही लोगों को निपटाना चाहिए अन्यथा इसके लिए कानूनी भी सख्त प्रावधान है । इसी के साथ किसानों को सामूहिक रूप से सरकारी तारबंदी योजना का भी लाभ लेना चाहिए । जबकि सामूहिक तारबंदी योजना में लोगों की रुचि कम है । लोग सामूहिक रूप से तारबंदी नहीं कर रहे हैं । कुलमिलाकर किसी के भी द्वारा किसी के खेत के रास्ते को अवरुद्ध नहीं किया जा सकता । अगर कोई किसी का रास्ता रोकता है तो निम्न प्रकार रास्ता लेने का अधिकार किसी भी किसान का है ।
#कानूननसमाधान-
राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 में कृषि भूमि में जाने के लिए रास्ते के संबंध में धारा 251 तथा धारा 251-क हैं। धारा 251 में आपका पहले से उपभोग में लिया जा रहा रास्ता किसी के द्वारा बंद कर देने या उस में बाधा पहुँचाने के संबंध में है तथा धारा 251-क किसी काश्तकार के खेत में आने जाने का रास्ता न होने पर नया रास्ता देने के संबंध में है। ये दोनों धाराएँ निम्न प्रकार हैं-

धारा- 251.
रास्ते तथा अन्य निजी सुखाचार के अधिकार-
(1) उस दशा में जब कोई भूमिधारी जो वस्तुतः रास्ते के अधिकार या अन्य सुखाचार या अधिकार का उपभोग कर रहा हो, अपने उक्त उपभोग में बिना उसकी सहमति के, विधि विहित प्रणाली से भिन्न तरीके से, बाधित किया जाय, तहसीलदार उक्तरूपेण बाधित भूमिधारी के प्रार्थना-पत्र पर तथा उक्त उपभोग एवं बाधा के विषय में सरसरी जाँच करने के पश्चात् बाधा को हटाये जाने की अथवा बंद किये जाने की और प्रार्थी भूमिधारी को पुनः उक्त उपभोग करने की आज्ञा, कर सकेगा चाहे उक्तरूपेण पुन: उपयोग किये जाने के विरुद्ध तहसीलदार के समक्ष अन्य कोई हक स्थापित किया जाय ।

(2) इस धारा के अन्तर्गत पारित कोई आज्ञा किसी व्यक्ति को ऐसे अधिकार या सुखाचार को स्थापित करने से विवर्जित नहीं करेगी जिसके लिये वह सक्षम सिविल न्यायालय में नियमित रीति से वाद प्रस्तुत करके दावा कर सकता हो।

251-क.

अन्य खातेदार की जोत में से होकर भूमिगत पाइपलाइन बिछाना या नया मार्ग खोलना या विद्यमान मार्ग का विस्तार करना.- (1) जहाँ

(क) कोई अभिधारी,अपनी जोत की सिंचाई के प्रयोजन के लिए किसी अन्य खातेदार की जोत में से होकर भूमिगत पाइपलाइन बिछाना चाहता है; या

(ख) कोई अभिधारी या अभिधारियों का कोई समूह अपनी जोत या, यथास्थिति, उनकी जोतों तक पहुंचने के लिए अन्य खातेदार की जोत में से होकर एक नया मार्ग बनाना चाहता है या किसी विद्यमान मार्ग को विस्तारित या चौड़ा करना चाहता है ।

और मामला पारस्परिक सहमति से तय नहीं होता है। तो ऐसा अभिधारी या, यथास्थिति, ऐसे अभिधारी ऐसी सुविधा के लिए संबंधित उप-खण्ड अधिकारी को आवेदन कर सकेंगे और उप-खण्ड अधिकारी, यदि संक्षिप्त जांच के पश्चात् उसका समाधान हो जाता है कि-

(i) यह आवश्यकता आत्यंतिक आवश्यकता है और यह जोत के केवल सुविधाजनक उपभोग के लिए नहीं है; और

(ii) अन्य खातेदार की जोत में से होकर, विशिष्ट रूप से नये मार्ग के मामले में, पहुंचने के वैकल्पिक साधन का अभाव सिद्ध किया गया है ।

तो आदेश द्वारा, आवेदक को, अभिधारी, जो उस | भूमि को धारित करता है, द्वारा सीमांकित या दर्शित लाईन के साथ-साथ भूमि की सतह से कम से कम तीन फुट नीचे पाइपलाइन बिछाने के लिए या ऐसे ट्रैक पर, जो उस अभिधारी द्वारा जो उस भूमि को धारित – करता है, दर्शाया जाये, भूमि में से होकर, और यदि ऐसा ट्रैक दर्शित नहीं किया जाये तो लघुतम या निकटतम रूट से होकर एक नया मार्ग जो तीस फुट से अधिक चौड़ा न हो, बनाने के लिए या विद्यमान मार्ग को तीस फुट से अधिक तक विस्तारित या चौड़ा करने के लिए,उस अभिधारी को,जो उस भूमि को धारित करता है, जिसमें से होकर पाइपलाइन बिछाने या एक नया मार्ग बनाने या विद्यमान मार्ग को चौड़ा करने का अधिकार मंजूर किया जाये,ऐसे प्रतिकर के संदाय पर जो विहित रीति से उप-खण्ड अधिकारी द्वारा अवधारित किया जाये, अनुज्ञात कर सकेगा।

(2) जहाँ उप-धारा (1) के अधीन नया मार्ग बनाने या किसी विद्यमान मार्ग को विस्तारित करने या चौड़ा करने का अधिकार मंजूर किया जाये वहाँ ऐसे मार्ग को समाविष्ट करने वाली उस भूमि के संबंध में अभिधृति निर्वापित की हुई समझी जायेगी और वह भूमि राजस्व अभिलेखों में “रास्ता’ के रूप में अभिलिखित की जायेगी।

(3) वे व्यक्ति, जिनको उप-धारा (1) में निर्दिष्ट सुविधाओं में से किसी भी सुविधा के उपभोग के लिए अनुज्ञात किया गया है, उक्त सुविधा के आधार पर उस जोत में, जिसमें से होकर ऐसी सुविधा मंजूर की जाये, कोई भी अन्य अधिकार अर्जित नहीं करेंगे।’

उक्त दोनों धाराओं के उपबंधों से आप समझ गए होंगे कि आप का मामला धारा 251 (1) का न हो कर धारा 251-क का है।

आप का सवाल यह था कि जिस पड़ौसी की भूमि में से रास्ता मांगा गया है और प्रकरण में पक्षकार बनाया गया है क्या उस के अलावा किसी अन्य जिसे प्रकरण में पक्षकार न बनाया गया हो उस की भूमि में से भी रास्ता दिया जा सकता है क्या? तो हमारा कहना है कि जिस से रास्ता मांगा ही नहीं गया उस से रास्ता नहीं दिलाया जा सकता है। जिस से रास्ता दिलाया जाए उस का प्रकरण में पक्षकार होना आवश्यक है। जिस की जमीन में से रास्ता दिया जाएगा उस का पक्ष सुना जाना आवश्यक है अन्यथा रास्ता दिए जाने का आदेश ही गैर कानूनी होगा। यदि ऐसी कार्यवाही लंबित है तो आप जिस के खेत में से आप रास्ता चाहते हैं वह यदि पक्षकार नहीं है तो उसे प्रकरण में पक्षकार बनाए जाने के लिए आप आवेदन कर सकते हैं ।

क्या है तारबंदी योजना

राजस्थान तारबंदी योजना को राज्य सरकार द्वारा किसानो को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए चलाई जा रही है । इस योजना के अंतर्गत राज्य के जो किसान अपनी खेत में तारबंदी (बाड़ बनाना ) करना चाहते है तो उन्हें राजस्थान सरकार द्वारा बाड़ बनाना के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई (Financial assistance will be provided by the Government of Rajasthan for fence-making.) जाएगी ।इस योजना मे आने वाले कुल खर्चे मे से सरकार आपको 50% खर्चा देगी। बाकि 50 % किसनओ को खुद देना होगा । आज हम आपको अपने इस आर्टिकल के माध्यम से इस Tarbandi Yojana 2020 से जुडी सभी जानकारी जैसे आवेदन प्रक्रिया ,पात्रता ,दस्तावेज़ आदि प्रदान करने जा रहे है ।अतः हमारे इस आर्टिकल को अंत तक पढ़े । इस योजना का लाभ राज्य के छोटे कर सीमांत किसानो को प्रदान किया जाएगा ।इस तार बन्दी राजस्थान 2020 के अंतर्गत अधिकतम 400 मीटर तक की तारबंदी के लिए ही सब्सिडी दी जाएगी। तारबंदी होने के बाद आवरा पशुओ से फसलों को बचाया जा सकेगा ।इसके लिए कम से कम 3 लाख 96 हजार रुपए तक की राशि उपलब्ध करवाई जाएगी। इस योजना के तहत राज्य के किसानो को 8 करोड़ रूपये की वित्तीय सहायता देने का लक्ष्य रखा है । राज्य के जो इच्छुक लाभार्थी राजस्थान तारबंदी योजना 2020 का लाभ उठाना चाहते है तो उन्हें सबसे पहले इस योजना के तहत अपना आवेदन करना होगा ।उसके बाद ही आपको इस योजना के तहत सरकार द्वारा आर्थिक सहायता प्राप्त होगी ।

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