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चीनी मिसाइल से कम नहीं है ग्‍लोबल टाइम्‍स, भारत, अमेरिका, ऑ‍स्‍ट्रेलिया के खिलाफ छेड़ा प्रोपेगेंडा वॉर

चीनी ‘मिसाइल’ से कम नहीं है ग्‍लोबल टाइम्‍स, भारत, अमेरिका, ऑ‍स्‍ट्रेलिया के खिलाफ छेड़ा प्रोपेगेंडा वॉर

भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में झड़प (India China Clash) के बाद माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। चीन ने जमीन के साथ-साथ सोशल मीडिया में भारत के ख‍िलाफ मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ रखा है। इसके ल‍िए उसने हथियार बनाया है ग्‍लोबल टाइम्‍स (Global Times) को।

ग्‍लोबल टाइम्‍स ने पिछले एक महीने में सैकड़ों ट्वीट करके न केवल भारत के खिलाफ बल्कि अमेरिका, ऑस्‍ट्रेलिया और ताइवान के खिलाफ मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ रखा है। दरअसल, चीन की बिना गोली चलाए ही युद्ध को जीतने की रणनीति रही है। इस रणनीति को अमल में लाने का काम चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्‍लोबल टाइम्‍स को दिया गया है। लद्दाख में तनाव के बाद चीन की प्रोपेगेंडा मशीन ग्‍लोबल ने भारत के खिलाफ एक तरीके से मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ दिया है।

लद्दाख के गलवान घाटी में चीन के सैनिकों ने 20 भारतीय सैनिकों की घात लगाकर निर्मम तरीके से हत्‍या कर दी। यही नहीं चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग के निर्देश पर पीएलए के हजारों सैनिक भारतीय जमीन पर कब्‍जा करने की ताक में खड़े हैं। चीन ने जमीन ही नहीं सोशल मीडिया में भी जंग छेड़ रखा है। इसके लिए चीन ने अपनी ‘मिसाइल’ ग्‍लोबल टाइम्‍स

ग्‍लोबल टाइम्‍स ने पिछले एक महीने में सैकड़ों ट्वीट करके न केवल भारत के खिलाफ बल्कि अमेरिका, ऑस्‍ट्रेलिया और ताइवान के खिलाफ मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ रखा है। दरअसल, चीन की बिना गोली चलाए ही युद्ध को जीतने की रणनीति रही है। इस रणनीति को अमल में लाने का काम चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्‍लोबल टाइम्‍स को दिया गया है। लद्दाख में तनाव के बाद चीन की प्रोपेगेंडा मशीन ग्‍लोबल ने भारत के खिलाफ एक तरीके से मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ दिया है।

ग्‍लोबल टाइम्‍स के जरिए दुष्‍प्रचार करती है चीन सरकार

भारत-चीन तनाव शुरू होने के बाद पिछले एक महीने में ग्‍लोबल टाइम्‍स ने दर्जनों की संख्‍या में ऐसी खबरें लिखी हैं और वीडियो जारी किए हैं जिससे चीन की ताकत को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जाए और भारत को कमजोर साबित किया जाए। ग्‍लोबल टाइम्‍स पहले चीन सरकार के दावे को व‍िशेषज्ञ के हवाले से कहता है और फिर सरकार भी उसको दोहराती है। एक तरीके से चीन सरकार अप्रत्‍यक्ष तरीके से अपने दावे को ग्‍लोबल टाइम्‍स के माध्‍यम से प्‍लांट कराती है और फिर खुद उसका समर्थन करती है।

इस उदाहरण गलवान घाटी है। सीमा विवाद शुरू होने के बाद ग्‍लोबल टाइम्‍स ने सबसे पहले दावा क‍िया क‍ि भारत के नियंत्रण वाली गलवान वैली चीन की है। गलवान घाटी चीन का इलाका है और भारत जानबूझकर वहां विवाद पैदा कर रहा है। भारत गलवान में चीन के इलाके में अवैध तरीके से डिफेंस फैसिलिटीज का निर्माण कर रहा है। इस कारण चीन की सेना के पास इसका जवाब देने के अलावा कोई चारा नहीं है। इसके बाद से चीन सरकार अब लगातार दावा कर रही है कि यह इलाका उसका है। इसी गलवान वैली में भारत और चीन के बीच सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए।

भारतीयों को डराने के लिए प्रोपेगेंडा वीडियो

ग्‍लोबल टाइम्‍स लगातार चीन की सेना के युद्धाभ्‍यास के वीडियो पोस्‍ट कर रहा है। उसका दावा किया है कि ये वीडियो तिब्‍बत में भारतीय सीमा के पास किए गए हैं। चीनी अखबार यह भी दावा किया है कि चीनी सेना ने अत्‍याधुनिक हथियार तैनात किए हैं कि उसका जवाब किसी देश के पास नहीं है। उसका दावा है कि ये हथियार पहाड़ों में जंग लड़ने के लिए बेहद कारगर हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक ग्‍लोबल टाइम्‍स का मकसद चीन की उसी रणनीति का हिस्‍सा है जिसके तहत वह बिना गोली चलाए जंग जीतना चाहता है।

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