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चीन से सीमा पर चल रहे तनाव के बीच रूस अब भारत की मदद को आगे आया है

भारत के लिए खतरा बना चीनी ड्रैगन, जल्‍द फाइटर जेट देगा ‘दोस्‍त’ रूस

चीन से सीमा पर चल रहे तनाव के बीच रूस भारत की मदद को आगे आया है। रूस ने कहा है कि वह भारत को जल्‍द से जल्‍द 31 लड़ाकू विमान मुहैया कराने के लिए तैयार है। भारत रूस से 31 लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी कर रहा है।

गलवान घाटी में 20 भारतीय सैनिकों की मौत के बाद भारत और चीन में तनाव बढ़ता जा रहा है। सीमा पर पाकिस्‍तान और चीन की दोहरी चुनौती से निपटने के लिए भारतीय वायु सेना को लड़ाकू विमानों की सख्‍त जरूरत है। इसी चुनौती से निपटने के लिए भारतीय वायुसेना ने रूस से 21 नए मिग -29 और 12 Su-30MKI का प्रस्‍ताव सरकार के पास भेजा है। इस बीच रूस ने कहा है कि वह भारत की जरूरतों को देखते हुए जल्‍द से जल्‍द इन विमानों को और ज्‍यादा आधुनिक बनाकर भारत को सौंपने के लिए तैयार है।

मिग-29 विमान को आधुनिक बना रहा रूस

WION न्‍यूज की रिपोर्ट के मुताबिक रूस और भारत सरकार के बीच होने वाली इस डील के लिए मास्‍को पूरी तरह से तैयार है। बताया जा रहा है कि रूस इन दिनों मिग-29 लड़ाकू विमानों को आधुनिक बनाने में जुटा हुआ है। एक बार जब इन विमानों के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी तो ये विमान चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के बराबर हो जाएंगे।

आधुनिकीकरण के बाद मिग-29 विमान रूस और विदेशों के आधुनिक हथियारों को अपने साथ लेकर बहुत तेजी से और ऊंचाई वाले स्‍थानों पर उड़ान भर सकेंगे। यही नहीं ये विमान दुश्‍मनों की पहचान करने में और ज्‍यादा कारगर हो जाएंगे। आधुनिक सामग्री और तकनीक की मदद से ये विमान अगले 40 साल तक भारतीय वायुसेना में अपनी सेवा दे सकेंगे।

ब्रह्मोस लैस रहेगा सुखोई-30 MKI जेट

भारत 12 सुखोई-30 MKI विमानों को खरीदने जा रहा है। भारत में मौजूद सुखोई विमानों को इस साल जनवरी महीने में ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल से लैस किया गया था। बताया जा रहा है कि सुखोई विमानों को हवा से हवा मार करने वाली नई मिसाइलों से लैस किया जाएगा। सुखोई-30 विमान बेहद कारगर माने जाते हैं। ये विमान भारत और रूस के बीच दोस्‍ती का शानदार प्रतीक माने जाते हैं। भारत ने 10 से 15 साल की अवधि में कई बार में 272 Su-30 फाइटर जेट्स के लिए आदेश दिए थे।

6 हजार करोड़ से मिलेंगे 33 फाइटर जेट

वायु सेना ने यह जांचने के लिए एक अध्ययन किया है कि मिग -29 की एयरफ्रेम लंबे समय तक काम करने के लिए पर्याप्त हैं और वे लगभग नई स्थिति में पाए गए हैं। मिग -29 को वायु सेना द्वारा उड़ाया जाता है और पायलट इससे परिचित होते हैं। वायु सेना के पास मिग -29 के तीन स्क्वाड्रन हैं। बताया जा रहा है कि इन विमानों की खरीद पर 6 हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

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