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जोशीमठ के स्वास्थ्य सामुदायिक केंद्र बन चुका है रेफर सेंटर-चमोली

चमोली जिले में स्थित जोशीमठ जहां आज भी आजादी के 73 साल बाद भी हॉस्पिटल रेफर सेंटर बन चुका है सोचिए उत्तराखंड चमोली जिले के आज भी ऐसे गांव हैं जहां गरीब लोग रहते हैं जिनके पास पैसा नहीं होता है ऐसे में कोई व्यक्ति बीमार हो जाता है उन्हें क्या करना होता होगा कई गांव ऐसे भी हैं जहां रोड की व्यवस्था नहीं है सोचिए जरा ऐसे में कोई मरीज या कोई महिला या बच्चा बीमार हो जाता है कैसे इलाज होता होगा यही देखने को मिला जोशीमठ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के हाल जहां पर डॉक्टरों की व्यवस्था नहीं है जोशीमठ शहर के माने जाने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बन चुका है रेफर सेंटर इतने बड़े क्षेत्र के होने के बावजूद भी आज भी डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं हो पाई है इस हॉस्पिटल में लोग हल्के-फुल्के इलाज करवाते हैं बड़ी बीमारियों के लिए यहां से रेफर किया जाता है यहां पर वह मरीज आते हैं जिनको पता नहीं होता है कि हमारा इलाज यहां पर हो सकता है अगर कोई व्यक्ति ज्यादा बीमार है तो यहां से रेफर किया जाता है ऐसे हैं आज भी उत्तराखंड के कहीं स्वास्थ्य केंद्र कई हॉस्पिटल ऐसे भी है कि जहां पर डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं है सोचिए जरा की अगर कोई व्यक्ति ज्यादा बीमार हो जाता है तो उसका हाल कैसा होता होगा कहने को जोशीमठ बहुत बड़ा क्षेत्र है लेकिन आज भी स्वास्थ्य के हाल बड़े ही बेहाल चल रहे हैं स्वास्थ्य केंद्र में ना ही दवाई की व्यवस्था है नाही डॉक्टर की व्यवस्था है सरकार बड़ी-बड़ी दावे करती है कि स्वास्थ्य के बारे में लेकिन आजादी के 73 साल बाद भी जोशीमठ की जनता बहुत परेशान है ना ही इस हॉस्पिटल में मरीजों की जनसंख्या है नाही डॉक्टर की व्यवस्था है जोशीमठ क्षेत्र के जितने भी गांव आते हैं उन गांव से यदि कोई व्यक्ति बीमार हो जाता है तो वह शहर की तरफ भागता है क्योंकि इन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के हाल बड़े बुरे हाल हैं इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है नाही इन हॉस्पिटलों की जांच होती है इन हॉस्पिटलों की देखरेख करने वाला कोई नहीं है जोशीमठ के स्वास्थ्य केंद्र के हाल बड़े बुरे हाल हैं कहने को तो इस हॉस्पिटल में अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे तमाम मशीनें यहां पर धूल चाट रही है कोई भी डॉक्टर नहीं है यहां पर सोचिए जरा यदि कोई व्यक्ति बीमार हो जाता है तो उसे कहां तक पहुंचाना है उनके घर वालों को पता नहीं होता है कहीं दिक्कत है आती है स्थानीय लोगों को सरकार बड़ी-बड़ी दावे करते हैं कि जरा देखिए कि उत्तराखंड चमोली जिले के स्वास्थ सामुदायिक केंद्र का हाल इसीलिए उत्तराखंड के कई गांव आज भी पलायन कर रहे हैं जरा सोचिए कि यदि कोई गांव पूरा खाली हो जाता है तो क्या होगा उस गांव के जो लोग छूट जाते हैं उन ग्राम वासियों का क्या हाल होता होगा वैसे तो उत्तराखंड देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है लेकिन स्वास्थ्य शिक्षा और सड़क से भी कहीं गांव आज भी बहुत पीछे हैं आज भी उत्तराखंड में ऐसे गांव हैं जिनको पता नहीं है कि हमारे स्वास्थ्य सामुदायिक केंद्र का बड़ा बुरा हाल है लोग अपने मरीजों को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाते हैं कि हमारा मरीज का इलाज यहां पर हो जाए बाद में पता लगता है कि यहां से रेफर किया जाता है तो उन्हें कितना दुख होता होगा सोचिए जरा की किसी व्यक्ति के पास एक भी पैसा नहीं हो तो उसे क्या करना होता होगा जोशीमठ की जनता बहुत परेशान है अपने स्वास्थ्य केंद्र को लेकर के देखा जाए तो इंसान चंद्रमा पर पहुंच चुका है लेकिन आजादी के 73 साल बाद भी कहीं गांव परेशानी की मार झेल रहे हैं नाही स्वास्थ्य शिक्षा सड़क की व्यवस्था न होने के कारण लोग शहरों की तरफ भाग रहे हैं उत्तराखंड के कई गांव आज भी खाली खाली महसूस कर रहे हैं अगर उत्तराखंड में स्वास्थ्य शिक्षा और सड़क की व्यवस्था हो जाती है तो पलायन रुक सकता है बड़े बुरे हाल हैं उत्तराखंड चमोली जिले के स्वास्थ्य सामुदायिक केंद्र के कहने को तो सरकार द्वारा हॉस्पिटलों की व्यवस्था हर क्षेत्र में करा दी गई है क्या करना उन हॉस्पिटलों का जहां पर ना डॉक्टर है ना मरीज है ना ही कोई कर्मचारी है इन हॉस्पिटलों का जायजा लेने वाला भी कोई नहीं है जोशीमठ से नवीन भंडारी की रिपोर्ट

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