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डाबलाकचरा में महायज्ञ में भागवत कथा प्रांरभ
डाबलाकचरा में महायज्ञ में भागवत कथा प्रांरभ

डाबलाकचरा में महायज्ञ में भागवत कथा प्रांरभ

नारद जी के पूर्वजन्म की कथा, शुखदेव चरित्र आदि का भक्ति से परिपूर्ण वर्णन

डाबला कचरा में चल रहे श्री विष्णु महायज्ञ में बुधवार को तीसरेे दिन 11000 आहुति के साथ पूर्व स्थापित देवता का पूजन किया गया। तत्पश्चात सांयकाल सत्र में यज्ञचार्य पं. कमल कृष्ण महाराज के मुखारविंद से श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। जिसमें नारद जी के पूर्वजन्म की कथा, शुकदेव चरित्र, परिक्षित जन्म आदि की कथा सुनाई।
आयोजन समिति के प्रवक्ता आचार मनीष कुमार गौतम ने बताया कथा के दौरान कहा गया कि भगवान को प्राप्त करना सबसे सरल कलियुग में ही है। विकल्प बहुत मिलेंगे भटकाने के लिए। लेकिन संकल्प एक ही काफी है मंजिल तक जाने के लिए। इस लिए सत्कर्म का संकल्प लें। जैसे संकल्प और प्रयत्न वैसी ही सिद्धी।
भजनों ने किया भाव विभोर-कथा प्रसंगों में भगवान द्वारा परिक्षित की रक्षा, भीवम महाप्रयान परिक्षीत जन्म, पाण्डवों का स्वर्गारोहण, परिक्षित द्वारा कलियुग दमन, नारद जी के पूर्वजन्म की कथा, शुखदेव चरित्र आदि का भक्ति से परिपूर्ण वर्णन किया। पं. कमल कृष्ण ने कहा कि दान, पुण्य, गंगास्नान, तीर्थ की इच्छा मन में होते हुए भी हर कोई इसे नहीं कर पाता। यह सब सत्कर्म व्यक्ति के चाहने से नहीं भगवान की कृपा से ही सम्भव हो पाते हैं। जिस पर भगवान की कृपा होती है उसका मुख सत्य बोलने लगता है, कान कथा सुनने लगते हैं, जीभ हरिनाम संकीर्तन करती है। मोहन से दिल क्यों लगाया है, ये तुम जानों या मैं जानूं… जैसे भजनों पर भक्त भक्ति में साराबोर होकर खूब झूमें।

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