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दो जून की रोटी के जुगाड़ में शिक्षा की मुख्य धारा से दूर हुए बच्चे

सतपाल यादव

बहरोड़. राज्य सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान में शिक्षा से वंचित बच्चों को मुख्य धारा से जोडऩे को लेकर पिछले लंबे समय से विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही है। गरीब बच्चों को शिक्षा से जोडऩे के लिए सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम भी लागू किया हुआ है। लेकिन सरकार व विभाग के तमाम प्रयासों के बाद भी कस्बे समेत ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी गरीब परिवारों के कई बच्चे आज भी शिक्षा की मुख्य धारा से कोसों दूर है। गरीबी तथा परिवार की माली हालात ने इन्हें पढ़ाई लिखाई की जगह पर दो जून की रोटी के इंतजाम में लगा दिया है। ये बच्चे परिवार की स्थिति को देखकर दो जून की रोटी के लिए मेहनत मजदूरी करने को मजबूर है। क्षेत्र में आज भी अनेक गरीब परिवारों के बच्चे शिक्षा से वंचित है। परिवार की गरीबी के कारण इनके लिए स्कूल में जाकर पढऩा एक सपना बन कर रहा गया है। इनके मन में अपनी उम्र के बच्चों को स्कूल में पढऩे जाते देख पढऩे की इच्छा तो होती है लेकिन परिवार की हालात को देखकर यह वहीं पर रुक जाते है।कस्बे में दिनभर बच्चों को कचरा बीनने व अन्य काम करते हुए देखा जा सकता है। ये बच्चे स्कूल जाने की जगह पर अपने व परिवार के लिए दो जून की रोटी का जुगाड़ करते दिखते है। यह बच्चे विभिन्न स्कूलों के आगे हर रोज कचरा बीनने जाते है लेकिन इनके लिए स्कूल में पढऩा किसी पहाड़ पर चढ़ाई से कम नहीं है। विद्यालय में जाने की उम्र में इन्हें मेहनत मजदूरी करनी पड़ रही है।…

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