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नारी से ही पुरुष की पहचान है, लेकिन हम अपनी पहचान नहीं बना पाए-भीलवाडा

शाहपुरा में महिला दिवस के मौके पर ब्रह्माकुमारी राजयोग केन्द्र पर कार्यक्रम आयोजित

नारी से ही पुरुष की पहचान है, लेकिन हम अपनी पहचान नहीं बना पाए

शाहपुरा- मूलचन्द पेसवानी 

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के शाहपुरा के गांधीपुरी में स्थित राजयोग केन्द्र में रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिला स्नेह मिलन व फागोत्सव कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें मौजूद वक्ताओं ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने सहित अन्य विषयों पर विचार व्यक्त किए। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि शाहपुरा की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डा. अनुकृति उज्जेनिया थी तथा अध्यक्षता राजयोग केंद्र प्रभारी संगीता दीदी ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में शिक्षाविद उमा व्यास व प्रधानाचार्य रीता धोबी मौजूद रहे। शिक्षाविद अनुराग बाला पाराशर ने महिला दिवस के मौके पर स्वरचित कविता की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को उंचाईयां प्रदान की। सरोज राठौड़ ने संचालन करते हुए आज के दौर में महिलाओं की स्थिति व उपादेयता पर प्रकाश डाला। अतिथियों को बाबा की ईश्वरीय सौगात भेंट की गई। 

मुख्य अतिथि शाहपुरा की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डा. अनुकृति उज्जेनिया ने कहा कि संस्कारों के नाम पर नारी को शोषण को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए। शारीरिक, मानसिक व आर्थिक रूप से महिला को मजबूत रहना चाहिए। परिवार में आपस में सामजंस्य का केंद्र बिंदू नारी ही रहती है पर स्वयं के लिए वो कुछ नहीं कर पाती है। अपनी बच्चियों के साथ स्वयं को आत्मनिर्भर बन कर परिवार को संबल देने के साथ स्वयं को भी सक्षम बनाना होगा। सामाजिक परिवेश के मद्देनजर महिलाओं को स्वयं विवेक से कार्य करना चाहिए, किसी के दबाव में आने के बजाय आत्मसंतुष्टि से कार्य करना चाहिए पर वो सब संस्कारों के दायरे में होना चाहिए। 

राजयोग केंद्र प्रभारी संगीता दीदी ने कहा कि ने कहा कि नारी को स्वयं का शारीरिक व मानसिक ध्यान रखते हुए राजयोग के लिए समय निकाल कर राजयोग केंद्र आना चाहिए ताकि सर्वागिंण विकास हो सके। राजयोग केंद्र प्रभारी संगीता दीदी ने कहा कि नारी से ही पुरुष की पहचान है। पहले नारी का ही नाम का उच्चारण होता है। हम अपनी स्वयं की पहचान नहीं बना पाए। आज भी हमारी पहचान पुरुष के नाम से जुड़ी है। दीदी ने कहा कि आज 21वीं सदी में महिला के दो रूप दिखाई देते हैं। एक तरफ हम देखते हैं कि वो समाज के सभी क्षेत्रों में आगे बढ़कर कार्य कर रही हैं, जो पुलिस-सेना-अंतरिक्ष क्षेत्र पहले उनके लिए असंभव या जोखिम भरे माने जाते थे, वहां भी महिलाएं सफलता से कार्य कर रही हैं। दूसरी तरफ हम देखते हैं कि महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध का हर वर्ष आंकड़ा बढ़ रहा है। जैसे जैसे समाज सभ्य-सुशिक्षित हो रहा है। उतने ही महिलाओं के प्रति अपराध बढ़ रहे हैं। नारी सर्वोच्च पदों पर तो पहुंच गई, लेकिन आज भी वह दोहरी जिंदगी जी रही है। पुरुष प्रधान समाज में उसके हितों की रक्षा नहीं हो पा रही है। पुरुष भी इसमें सहयोगी बने।

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