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बिरला हॉस्पिटल के मैनेजमेंट की मनमानियां चरम पर-ग्वालियर  
बिरला हॉस्पिटल के मैनेजमेंट की मनमानियां चरम पर-ग्वालियर  

बिरला हॉस्पिटल के मैनेजमेंट की मनमानियां चरम पर-ग्वालियर  

बिरला हॉस्पिटल के मैनेजमेंट की मनमानियां चरम पर-ग्वालियर  

दो कमरों से शुरू हुए बिरला हॉस्पिटल को शिखर तक पहुंचाने में कर्मचारियों की दिन-रात की मेहनत को किया जा रहा है नजरअंदाज।

जी हां यहां कहना उचित होगा कि हर शाख पर उल्लू बैठा तो अंजामे गुलिस्तां क्या होगा

विगत डेढ़ वर्ष से लगातार चली आ रही बिरला हॉस्पिटल के कर्मचारियों की मांग को लेकर बिरला मैनेजमेंट की मनमानियां अब चरम सीमा पर पहुंच गई है। गौरतलब है कि 8 फरवरी को बिरला हॉस्पिटल मैनेजमेंट के द्वारा यूनियन के अध्यक्ष विष्णु शर्मा को अपनी मनमानी के दम पर सस्पेंड कर दिया है। अब यहाँ सवाल उठता है कि आखिर बिरला हॉस्पिटल मैनेजमेंट के द्वारा ऐसा क्यूँ किया जा रहा है तो जरा इस बात पर भी गौर करना आवश्यक है कि…..

क्या सही और सत्य के लिए आवाज़ उठाना गलत है….?

क्या कर्मचारियों का शोषण किया जाना उचित है….?

क्या कर्मचारियों द्वारा मरीजों का शोषण करवाया जाना उचित है….?

आखिर कब तक हॉस्पिटल के पुराने कर्मचारी इस बात को बर्दाश्त कर सकते है, जिन्होंने अपनी मेहनत और ईमानदारी से वर्षों से लगातार दिन-रात एक करके हॉस्पिटल को शिखर तक पहुँचाने में मेहनत की है, जोकि नींव के पत्थर है |

इन सभी बातो को मद्देनज़र रखा जाए तो यहां बिरला हॉस्पिटल का मैनेजमेंट पूर्णतया कटघरे में साबित होता नज़र आ रहा है।

गौरतलब है कि पिछले  एक डेढ़ वर्ष से यह मांग उठती रही है कि कर्मचारियों को ठेके पर रखना, शोषण करना, कर्मचारियों पर दबाव बनाकर मरीजों से अनाप-शनाप, अपने ही मनमाने तरीके से कर्मचारियों से लूट करवाना कहाँ तक जायज़ है, और फिर उन्हीं के ऊपर डंडा चलाना, उन्हीं का शोषण करना, यह कहां का मैनेजमेंट और कैसा मैनेजमेंट है…?

जब यूनियन इसका विरोध करती है, तो निशाना बनाया जाता है, पुराने कर्मचारियों को और यूनियन के अध्यक्ष को।

यहां साफ और स्पष्ट तौर पर बिरला हॉस्पिटल के मैनेजमेंट की मनमानियां पूर्णतया जगजाहिर होती हो नज़रआ रही है। इसका साफ़ और सीधा साक्ष्य 10 फरवरी को यूनियन के महासचिव राकेश जांगिड़ एवं अध्यक्ष को विष्णु शर्मा को अपने मनमाने तरीके से निलंबित कर दिया जाना नज़र आ रहा है। यहां यह बताना भी जरूरी है कि दो कमरों से शुरू हुए इस बिरला हॉस्पिटल को यहां तक पहुंचाने में इन तमाम कर्मचारियों की दिन-रात की मेहनत शामिल है। लेकिन अब जब हॉस्पिटल शिखर पर पहुंच चुका है तब दिल्ली में बैठे टॉप मैनेजमेंट के लोग इस हॉस्पिटल को लूटने में लग गए हैं, जी हां एक इस बात को आप बेहतर तरीके से ही जानते हैं किसी भी व्यवसाय या फिर साफ़-साफ़ कहें तो बिरला हॉस्पिटल को शिखर तक पहुंचाने में उन तमाम कर्मचारियों की मेहनत और लगातार उनकी कोशिश जो कि यहां अनदेखी के कगार तक पहुंच चुकी है और दिल्ली में बैठे टॉप मैनेजमेंट के लोग इस हॉस्पिटल को लूटने में लग गए हैं।

हालत यहां तक बदतर हो चुके है कि दिल्ली से बुलाए गए लोगों को 50000 से लेकर डेढ़ लाख रुपए तक का मासिक वेतन दिया जा रहा है, जबकि यहां के कर्मचारी जो कि पिछले 10 से 15 वर्षों से लगातार हॉस्पिटल को अपनी मेहनत के बल पर शिखर तक पहुंचाने में कहीं भी किसी भी तरह से पीछे नहीं रहे और आज उनका यहां शोषण किया जा रहा है और दबाव बनाया जा रहा है जोकि हॉस्पिटल को शिखर तक ले जाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं।

लेकिन यहां पुराने कर्मचारियों को धता बताते हुए नया स्टाफ रखकर खुली और बेरोकटोक लूट जारी रखने के लिए यूनियन के पदाधिकारियों का दमन जारी है और पूरा मैनेजमेंट इस साजिश में लगा हुआ है। बात इतनी सी है जो कि यूनियन की तरफ से की गई है कि….

ट्रस्ट की निष्पक्ष जांच ऑडिट कराई जाए और भ्रष्ट कर्मचारियों को हटाया जाए….

सस्पेंड किए गए कर्मचारियों का सम्मान वापस लिया जाए….

साथ ही आउटसोर्सिंग (नर्सिंग, सिक्योरिटी, सफाई सहित सभी स्थानों से) खत्म की जाए…

प्रबंधन एवं कर्मचारियों की एक कमेटी भी बनाई जाए….

बिरला हॉस्पिटल के मैनेजमेंट की मनमानियां चरम पर-ग्वालियर  
बिरला हॉस्पिटल के मैनेजमेंट की मनमानियां चरम पर-ग्वालियर
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बिरला हॉस्पिटल के मैनेजमेंट की मनमानियां चरम पर-ग्वालियर
बिरला हॉस्पिटल के मैनेजमेंट की मनमानियां चरम पर-ग्वालियर  
बिरला हॉस्पिटल के मैनेजमेंट की मनमानियां चरम पर-ग्वालियर

यूनियन लगातार शांतिपुरी धैर्य रखे हुए हैं और साथ ही श्रम कार्यालय, जिला प्रशासन मंत्री, विधायकों से मिलकर शांतिपूर्ण समाधान के प्रयास कर रही है एवं साथ ही मरीजों का भी ध्यान रख रही है।

 

About Pankaj Sharma

Manager at Gangapur City Portal

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