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भगवान मुनिसुव्रतनाथ जहाज मंदिर की मूल वेदी में विराजित-भीलवाड़ा

भगवान मुनिसुव्रतनाथ जहाज मंदिर की मूल वेदी में विराजित

आठ दिवसीय पंचकल्याणक सानन्द सम्पन्न

भीलवाड़ा- मूलचन्द पेसवानी 

जिले के जहाजपुर के स्वस्तिधाम मंे भगवान मुनिसुव्रतनाथ जिन बिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ अन्तिम दिवस आज शुक्रवार को भूगर्भ से प्रगटित मुनिसुव्रतनाथ जहाज मंदिर में जयकारांे के साथ विजरामान हुए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं द्वारा मुनिसुव्रत की जय जयकारांे की गूंज ही गूंज रही।

आचार्य ज्ञानसागर महाराज, आचार्य विनत सागर, आचार्य सुव्रतसागर, महाराज व समस्त मुनिसंघ व आर्यिकारत्न स्वस्तिभूषण अनीता, प्रियंका, शालू, गुंजा, दीदी व प्रतिष्ठाचार्य, जय निशान्त, नितिन भैया के सानिध्य मंे प्रातःकालीन वेला में मुनिसुव्रतनाथ भगवान को जहाज मंदिर मंे विराजित किया।

विराजमान करने का सौभाग्य भूपेन्द्र हुम्मड़ परिवार मुम्बई को मिला। बाॅयी तरफ की वेदी में श्री आदिनाथ भगवान व दाॅयी तरफ वेदी मंे श्री महावीर भगवान को विराजमान करने का सौभाग्य प्रदीप जैन रोहतक एवं पन्नालाल बैनाड़ा आगरा को प्राप्त हुआ। लगभग 1200 प्रतिमाएँ दूर-दूर से आए भक्तांे ने मंत्रोच्चार एवं जयकारांे के संग विश्व की अनोखी रचना जहाज मंदिर में स्थापित की। जहाज मंदिर मंे छत्र, भामंडल, शिखर पर कलशारोहण एवं ध्वजा का आरोहण कार्य भी सम्पन्न हुए। इससे पूर्व सौधर्म इन्द्र, कुबेर ने गजरथ पर सवार होकर मुख्य पंडाल की 3 पदक्षिणा दी। उनके आगे आचार्य ज्ञानसागर, आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ सभी को आशीर्वाद देते हुए चल रहे थे, उससे आगे कोल्हापुर का युवा बैण्ड भारी भीड़ में उत्साह का संचार करता हुआ। सबसे आगे कृष्णा बैंक की मधुर भजनों की गूंज सुनाई दे रही थी। रथ यात्रा पर हेलीकाॅप्टर द्वारा निरन्तर पुष्प वर्षा होती रही। इस बेला में आर्यिकारत्न स्वस्तिभूषण माताजी बहुत भाव-विभोर हो गयी, उन्होंने कहा आज यह सब देख मन गद-गद है। मन इतना गदगद है कि मेरे पास आज शब्द नहीं है। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति, श्री मुनिसुव्रतनाथ (स्वस्तिधाम) दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र समिति, शुभकामना परिवार, साहित्य कल्याण समिति तथा प्रशासनिक व्यवस्थाओं के अन्तर्गत पुलिस, बिजली, पानी, यातायाज, जन संपर्क एवं सभी विभागों का तथा स्थानीय जहाजपुर समाज, आसपास के गांवों के श्रावकांे का इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा। जिसके लिये आर्यिकारत्न स्वस्तिभूषण माताजी ने बहुत-बहुत आशीर्वाद प्रदान करके सुख शांति समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। 

इस अवसर पर आचार्य ज्ञानसागर महाराज ने कहा आज स्वस्तिभूषण माताजी का सपना साकार हो गया। आप कार्य करते जाओ सब मंगल ही मंगल होगा। आपको कोई तकलीफ नहीं होगी। स्वस्तिधाम का पंचकल्याणक महोत्सव ऐतिहासिक पंचकल्याण महोत्सव में शुमार हो गया जो सचमुच किसी कीर्तिमान से कम नहीं है। राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र, राजस्थान सरकार के मंत्री शांतिलाल धारीवाल, भाया प्रमोद जैन ने शिरकत की। गोल्डन बुक आॅफ रिकाॅर्ड व इण्डिया बुक आॅफ रिकाॅर्ड में स्वस्तिधाम का नाम दर्ज होना किसी कीर्तिमान से कम नहीं है।

राजगृही का सुन्दरतम नजारा, साक्षात् सेमवसरण का दिव्य दर्शन, भक्तों के लिए आवास व्यवस्था, भोजन, अल्पाहार व अन्य व्यवस्था अविस्मरणीय रही। 4000 से अधिक कार्यकर्ता बन्धु ने अपनी सेवाऐं दी। जन्मकल्याण की शोभायात्रा जब नगर में निकली भक्तांे का जन सैलाब उमड़ा। इस अवसर पर पंचकल्याणक महासमिति के अध्यक्ष विनोद जैन (टोरडी), सचिव ज्ञानेन्द्र जैन, अतिशय कमेटी के अध्यक्ष जौहरी लाल जैन, शुभकामना परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयकुमार कोठारी, विकास जैन आदि सभी पदाधिकारियों एवं महापात्रांे ने पूर्ण कार्यक्रम को उचाईयां प्रदान की। पूरे पंचकल्याणक महोत्सव के आठों दिन ही हैलीकाॅप्टर से दर्शनार्थियों एवं यात्रियांे को जहाजपुर नगर एवं स्वस्तिधाम का भ्रमण कराते हुए पुष्पवृष्टि करते हुए माहौल को चार-चांद लगाने में अपनी महत्वपूर्ण सहभागिता अर्पित की।

अष्ट दिवसीय इस पंचकल्याणक महोत्सव में विशाल मंच के माध्यम से अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम, समोशरण की झांकी, कवि सम्मेलन, भजन सध्ंया आदि अनगिनत कार्यक्रमों स्थानीय तथा बाहर की असंख्य भक्तों ने आकर कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति तथा सहभागिता प्रदान की।

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