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भारतीय किसान संघ द्वारा वज़ीरपुर तहसील में तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री महोदय को ज्ञापन दिया गया===== गंगापुर सिटी

 भारतीय किसान संघ द्वारा वज़ीरपुर तहसील में तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री महोदय को ज्ञापन दिया गया ज्ञापन में किसानों की समस्याओं को लेकर आया की विगत 13 साल से कमांड क्षेत्र को पानी नहीं मिला है lock down के चलते हुए किसानों को किसानों को नहर के माध्यम से पानी उपलब्ध करवाया गया और चंबल सवाई माधोपुर नादोती पेयजल परियोजना का पानी बजीरपुर तहसील के गांव के लिए उपलब्ध करवाया जाए लॉक डॉउन के चलते हुए किसानों को विकट समस्या है , बिजली के बिलमाफ किया जाए 6 माह के , बिना व्याज का ऋण उपलब्ध कराया जावे , किसान की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो किसान सत्याग्रह किया जावेगा , राजेश आदिवासी ने बताया कि पानी के लिए 35 गांवो के किसान लगभग1 लाख परिवार का जीवन स्तर सुधर सकता है , यह बांध करौली से 12 किलोमीटर दूर 125 करोड़ रूपये की लागत से करौली व सवाईमाधोपुर जिलों के 35 गांवों की लगभग 40,000 बीघा भूमि की सिंचाई हेतु बनाये गए 2100 MCFT क्षमता वाले पांचना डैम (बांध) से वर्ष 1990-91 से 2005-06, 13 वर्षों तक अच्छी सिंचाई हुई। कमांड एरिया के लगभग 1 लाख से ज्यादा नागरिकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में इसका अतिमहत्पूर्ण योगदान रहा। परन्तु अब पिछले 13 सालों अर्थात वर्ष 2007 से कमांड एरिया की नेहरों में पानी नहीं छोड़ने से क्षेत्र के नागरिक बेहद परेशान एवं दुखी और कुपित है। नहरों में पानी नहीं छोड़ने से क्षेत्र के लोगों को निम्लिखित नुकसान हो रहे है - 

1. सिंचित व असिंचित फसल के उत्पादन की मात्रा में अन्तर के कारण प्रति फसल सीजन में लगभग 100 करोड़ रूपये की आर्थिक हानि होती हैं।

2. जिन थोड़े बहुत किसानों के पास भूजल की उपलब्धता है, सिंचाई हेतु पानी उपयोग करने के लिए उन्हें बिजली व डीजल संचालित उपकरणों का प्रयोग करना पड़ता है जिससे कृषि उत्पादन की लागत बहुत अधिक बढ़ जाती है।

 

3. भूमि क्रय-विक्रय के समय रजिस्ट्री के चार्ज तथा भेज कमाण्ड एरिया होने के कारण बढ़ी हुई दर से लगते है।

4. ट्यूबेल व पम्पिंगसेट के माध्यम से भू-जल के अधिक दोहन की वजह से भू-जल का स्तर बहुत नीचे चला गया है जिससे पीने के पानी तक की समस्या हो जाती है। बोरवेल से फ़्लोराइडयुक्त खारे पानी के कारण ज़मीन की उर्वरकता ख़राब हो रही है। कुछ गांवों में तो बाहर से मिट्टी लानी पड़ती है।     

5.पानी की कमी के कारण चारा नहीं होने से पशुपालन का व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

6. पानी की किल्लत से खेती नहीं होने के कारण कम भूमि वाले कृषको को रोजगार के लिए क्षेत्र से शहरों की ओर पलायन करना पड़ रहा है।

7. रोजगार नहीं होने से युवा विभिन्न प्रकार की असामाजिक गतिविधियों एवं स्मैक जैसे ख़तरनाक नशे के शिकार हो रहें है। 

8. पांचना डैम के लगातार भरे रहने से भराव क्षेत्र में हमेशा पानी रहता है जिसके कारण वहां पहले गर्मियों के दिनों में माली जो सब्जी करते थे उनका रोजगार छीन गया हैं और आसपास के लोगों के ताजा सब्जियां भी नहीं मिलती है। 

9. आमदनी नहीं होने से क्षेत्र के किसान कर्जदार बन रहें हैं। बच्चों को शिक्षा दिलाने तक में गंभीर समस्याएं आ रहीं है।

10. क्षेत्र की जनता की आर्थिक स्थिति ख़राब होने से व्यवसाय करने वाले लोगों व मजदूरों और सभी की हालत भी ख़राब हो रही है।

11. नहर में पानी नहीं खोलने से सरकार की छबि भी खराब हो रही है। सम्पूर्ण व्यवस्था के प्रति नागरिकों के मन में ख़राब भाव आता है।

RTI से प्राप्त सूचना के अनुसार नहरों में पानी नहीं खोलने का कारण “गुर्जर आंदोलन” बताया गया। महोदय निवेदन है कि वर्ष 2007 के “गुर्जर आरक्षण आंदोलन” के दौरान इस पांचना डैम की नहरों में पानी छोड़ना बंद किया गया। परन्तु ग़ौरतलब है कि “गुर्जर आरक्षण आंदोलन” रेलवे, हाई-वे, छोटी सड़कें व बाजारों में दुकानें इत्यादि बहुत कुछ बंद हुए थे। पांचना की नहरों में पानी छोड़ने के अलावा रेलवे, हाई-वे, छोटी सड़कें व दुकानें इत्यादि सब कुछ आंदोलन की समाप्ति के पश्चात वर्ष 2007 में ही चालू हो गए। केवल पांचना डैम की नहरों में पानी चालू नहीं हुआ और कमांड एरिया के किसानों एवं हर सर्वसाधारण नागरिक के साथ यह एक त्रासदी बनकर रह गया है।  

महोदय कमांड एरिया के किसानों व दूसरे सभी नागरिकों की व्यथा एवं परेशानियों को समझें एवं इस विषय में निम्नलिखित अनुरोध है - 

COVID-19 महामारी की वज़ह से इस वक्त शहरों से अधिकांश मज़दूरों के गाँवों में आ जाने से गाँवों की जनसंख्या बढ़ी हुई है। इस मौसम में भयंकर गर्मी भी पड़ रही है। क्षेत्र में सामान्य: रूप से ही पानी की जो कमी रहती है, वह गर्मी और बढ़ी हुई जनसंख्या के कारण किल्लत बन गई है। पांचना डैम से गंभीर नदी में पानी खोलने के बावजूद भी नदी व नहर के सिल लेवल में 3 मीटर के अंतर होने के कारण अभी भी नहर में 3 मीटर पानी, जो कि लगभग 800 करोड़ लीटर होता है, डैड स्टोरेज के ऊपर से छोड़कर कमांड एरिया के नागरिकों और पशु-पक्षियों को राहत प्रदान की जा सकती है। अतः निवेदन है कि पांचना डैम की नहरों में अविलम्ब पानी खुलवाकर अनुग्रहित करें।

इस बार अक्टूबर 2020 से जब फसल का सीजन आए तो उससे पहले नहरों की मरम्मत करवा ली जाए ताकि पानी बर्बाद नहीं हो और उस वक़्त समय से नहरों में आवश्यक रूप से पानी खोले जाने के प्रबंध कर लिए जाएं।

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