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भारत का अंतिम गांव नीति

नीति घाटी जाने के लिए उत्सुक है यहां के ग्रामीण भारत का अंतिम गांव नीति जहां आजकल लॉक डाउन के चलते यहां के स्थानीय लोगों को दिक्कतें आ रही है क्योंकि यह लोग ग्रीष्मकालीन के समय पर इन गांव में यहां पर रहते थे भारत का अंतिम गांव कहे जाने वाला नीति गांव जहां पर स्थानीय लोग अपनी काश्तकारी और साथ में गाय भैंस बकरी सब कुछ अपने साथ ले जाते थे और वहां पर अपनी खेती करते थे इस समय पर सारे स्थानीय लोग इस समय पर वहां पर प्रवेश करते थे शासन प्रशासन की बात किया जाए तो अभी इन पर विचार कर रही है इन्हें वहां तक कैसे पहुंचाएं जाए क्योंकि इस समय आना-जाना सब जगह बंद हो चुका है यहां के स्थानीय लोगों को इस समय अपने निवास स्थान पर पहुंचना था उन्हें काफी दिक्कतें आ रही है यहां पर कई गांव पड़ते हैं जहां पर तमाम प्रकार की खेती की जाती थी और वहां पर बहुत चहल-पहल देखने को मिलती थी कहीं परिवार इन गांव में रहते थे 6 महीने भोटिया जनजाति के लोग यहां पर निवास करते थे पूरा परिवार आजकल शासन प्रशासन ने फिलहाल यहां पर रोक लगा दी गई थी अब शासन प्रशासन इस पर विचार कर रहा है कैसे करके इन लोगों को वहां तक इनको पहुंचाया जाए अब इसकी घोषणा बाकी है सब लोग अभी शासन-प्रशासन की राह देख रहे हैं बताया जा रहा है कि उप जिलाधिकारी इस विषय पर कार्रवाई कर रहे हैं कैसे करके इनको वहां तक पहुंचाई जाए अभी घोषणा नहीं की गई है और यह लोग अभी भी दिक्कतें का सामना कर रहे हैं जबकि यह लोग हर साल अपने निवास स्थान पर जाते थे इस साल इनको काफी समय लग चुका है जिस कारण स्थानीय लोग यहां पर जाने के लिए बेताज है यहां पर तमाम प्रकार के गांव आपको नजर आ सकते हैं बहुत बड़ा क्षेत्र होने के बावजूद यहां के स्थानीय लोग अप्रैल माह में अपने निवास स्थान पर पहुंच जाते थे और इनको काफी अब समय हो चुका है क्योंकि इनको वहां पर अपनी खेती की तैयारी करनी थी जिसका समय बीता ही जा रहा है समय काफी देर होने के बाद यहां की स्थानीय लोगों को अब डर सताने लगा है क्योंकि इस समय बुवाई की जाती थी इनका रोजगार खेती किसानी से होता था और समय काफी हो चुका है जिससे यहां के शासन प्रशासन अपनी उचित कार्रवाई जल्दी कहने की बात कह रहा है कुछ ही दिनों में यह लोग अपने अपने गांव में प्रवेश कर जाएंगे नीति माना घाटी जो भारत के अंतिम गांव है आजकल हजारों की संख्या में स्थानीय लोग यहां पर पहुंच जाते थे लॉक डाउन के चलते यह लोग अपने पैतृक गांव में अभी तक नहीं पहुंच पाए ।
नीति घाटी से नवीन भंडारी की खास रिपोर्ट

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