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भारत की इकॉनमी में इस साल आएगी छह दशकों की सबसे बड़ी गिरावट : IMF
भारत की इकॉनमी में इस साल आएगी छह दशकों की सबसे बड़ी गिरावट : IMF

भारत की इकॉनमी में इस साल आएगी छह दशकों की सबसे बड़ी गिरावट : IMF

भारत की इकॉनमी में इस साल आएगी छह दशकों की सबसे बड़ी गिरावट : IMF

आईएमएफ ने 2020 में ग्लोबल ग्रोथ रेट में 4.9 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान जताया है। IMF के रेकॉर्ड के अनुसार 1961 के बाद से यह सबसे धीमी वृद्धि है। उसका कहना है कि पहली छमाही में वायरस का इकॉनमी पर असर उम्मीद से कही ज्यादा गंभीर है।

नई दिल्ली
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) ने बुधवार को कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में 2020 में 4.5 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है और यह ऐतिहासिक गिरावट होगी। उसने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी और इसकी रोकथाम के उपायों के चलते अधिकांश आर्थिक गतिविधियां ठप होने के कारण इतनी बड़ी गिरावट आने का अनुमान है। हालांकि उसका अनुमान है कि 2021 में देश में फिर से तेजी की राह पर लौट आएगा और उस साल 6.0 प्रतिशत की मजबूत आर्थिक वृद्धि देखने को मिल सकती है।

ग्लोबल ग्रोथ रेट में 4.9 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान
आईएमएफ ने 2020 में ग्लोबल ग्रोथ रेट में 4.9 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान जताया है। यह अप्रैल 2020 में जारी विश्व आर्थिक परिदृश्य (World economic scenario) के अनुमान से और 1.9 प्रतिशत नीचे है। मुद्राकोष की मुख्य अर्थशास्त्री भारतीय-अमेरिकी गीता गोपीनाथ ने Updated world economic scenario जारी करने के मौके पर कहा, ‘इस विकट संकट को देखते हुए हमारा अनुमान है कि अर्थव्यवस्था में 2020 में 4.5 प्रतिशत की गिरावट आएगी। यह अनुमान ऐतिहासिक रूप से नीचे है। कमोबेश यह स्थिति लगभग सभी देशों की है।’

पहली छमाही का हाल बहुत खराब
रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी का 2020 की पहली छमाही में गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव अनुमान से कहीं ज्यादा व्यापक है। वहीं रिवाइवल पूर्व के अनुमान के मुकाबले धीमा है। वर्ष 2021 में वैश्विक वृद्धि 5.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह पहली बार है जब सभी क्षेत्रों में 2020 में वृद्धि में गिरावट का अनुमान है। चीन में जहां पहली तिमाही में तीव्र गिरावट के बाद रिवाइवल जारी है, वहां 2020 में वृद्धि दर 1.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

ज्यादा दिन लॉकडाउन का गंभीर असर
आईएमएफ ने कहा, ‘भारत की अर्थव्यवस्था में 4.5 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है। इसका कारण अधिक समय तक ‘लॉकडाउन’ और अप्रैल में अनुमान के विपरीत धीमा रिवाइवल है।’ मुद्राकोष के रेकॉर्ड के अनुसार 1961 के बाद से यह सबसे धीमी वृद्धि है। आईएमएफ के पास उससे पहले का आंकड़ा नहीं है। उसने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में 2021 में तेजी आने की उम्मीद है और इसमें 6.0 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है। वर्ष 2019 में भारत की वृद्धि दर 4.2 प्रतिशत थी।

अप्रैल के अनुमान से बेहतर
आईएमएफ का भारत की 2020 की स्थित का ताजा अनुमान अप्रैल के अनुमान से बेहतर है। अप्रैल में अनुमान था कि वर्ष के दौरान गिरावट 6.4 प्रतिशत रहेगी। लेकिन 2021 में 6 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान अप्रैल में आयी रिपोर्ट के मुकाबले 1.4 प्रतिशत कम है। गोपीनाथ ने कहा, ‘कोविड-19 महामारी के कारण अर्थव्यवस्था को महा बंद का सामना करना पड़ा। इससे वायरस को काबू में करने और जीवन को बचाने में मदद मिली लेकिन महा मंदी के बाद यह सबसे बड़ी नरमी की चपेट में भी आयी है।

75 प्रतिशत देश इकॉनमी खोल रहे हैं
उन्होंने कहा कि 75 प्रतिशत से अधिक देश अब अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ खोल रहे हैं। दूसरी तरफ कई उभरते बाजारों में महामारी तेजी से फैल रही है। कई देशों में सुधार हो रहा है। हालांकि चिकित्सा समाधान के अभाव में रिवाइवल काफी अनिश्चित है और विभिन्न क्षेत्रों तथा देशें पर प्रभाव अलग-अलग है।’ अपने ब्लॉग पोस्ट में गोपीनाथ ने कहा कि इस वैश्विक संकट के जैसा कोई और नहीं है। वहीं रिवाइवल के जैसा भी कोई दूसरा रिवाइवल नहीं होगा। उन्होंने कहा, ‘पहले इस अप्रत्यशित संकट ने निर्यात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं में रिवाइवल संभावनाओं को प्रभावित किया। साथ ही विकासशील और विकसित अर्थव्यवस्थाओं के बीच आय समन्वय की संभावनाओं को धूमिल किया।’

विकसित देशों की विकास दर में 8 पर्सेंट तक गिरावट
गोपीनाथ ने कहा, ‘हमारा अनुमान है कि 2020 में विकसित और उभरते तथा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में बड़ी नरमी आएगी। विकसित अर्थव्यवस्था में जहां वृद्धि दर में 8 प्रतिशत की गिरावट आएगी। वहीं उभरते और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के मामले में वृद्धि दर 3 प्रतिशत घटेगी। और अगर चीन को हटा दिया जाए तो यह गिरावट 5 प्रतिशत होगी। साथ ही 95 प्रतिशत से अधिक देशों में 2020 में प्रति व्यक्ति आय में नकारात्मक वृद्धि होगी।’

संक्रमण बढ़ने पर आर्थिक स्थिति और बिगड़ेगी

अपने ब्लॉग में उन्होंने लिखा है कि इस अनुमान के ऊपर और नीचे जाने का जोखिम भी अधिक है।उन्होंने कहा कि अनुमान के ऊपर जाने का मतलब है कि टीका और इलाज के अलावा नीतिगत मोर्चे पर कुछ अतिरिक्त उपायों से आर्थिक गतिविधियां तेज हो सकती है। वहीं अगर संक्रमण बढ़ने की दर तेज होती है तो खर्च बढ़ेंगे और वित्तीय स्थिति और तंग होगी। इससे स्थिति और खराब हो सकती है।

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