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महाप्रभु स्वामी रामचरण प्राकट्य त्रिशताब्दी महोत्सव में दूसरे दिन उमड़ा सैलाब-भीलवाड़ा

महाप्रभु स्वामी रामचरण प्राकट्य त्रिशताब्दी महोत्सव में दूसरे दिन उमड़ा सैलाब

महाप्रभु रामचरण की तपोस्थली रामनिवास धाम रामधाम दिव्य तीर्थ के समान

आध्यात्मिक वेदांत के प्रकाश को बिखरने में महाप्रभु रामचरणजी महाराज अग्रदूत- रामदयालजी

शाहपुरा (भीलवाड़ा)- मूलचन्द पेसवानी 

रामस्नेही संप्रदाय, शाहपुरा के जन्मदाता महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज के सात दिवसीय प्राकट्य त्रिशताब्दी समारोह के दूसरे दिन सोमवार को रामनिवास धाम परिसर में बनाये गये विशाल डोम में धर्मसभा व प्रवचन सभा का आयोजन हुआ। इस दौरान आज भी सैलाब उमड़ा। पंगत प्रसादी में हजारों की तादाद में भक्तों ने प्रसादी ग्रहण की। हजारों लोगों की मोजूदगी में आयोजित सभा की अध्यक्षता शाहपुरा रामस्नेही सम्प्रदायाचार्य अनन्त श्रीविभूषित जगतगुरू स्वामीजी श्री रामदयालजी महाराज ने की। इस दौरान बतौर वक्ता के रूप में रेवासा के जगतगुरू अग्रपीठाधीश्वर अनन्त विभूषित स्वामीश्री श्रीराघवाचार्यजी महाराज व अमरज्ञान निरंजनी आश्रम शक्करगढ के महामंडलेश्वर अनन्त विभूषित स्वामीश्री जगदीशपुरीजी महाराज मौजूद रहे। अपरान्हकाल में हुए दूसरे प्रवचन में वेदान्ताचार्य सनातन आर्श विद्या प्रतिष्ठान इन्दौर के महामंडलेश्वर अनन्त विभूषित स्वामीश्री प्रणवानन्दजी महाराज, चिन्मय मिशन इन्दौर के अनन्त विभूषित स्वामीश्री प्रबुद्धानन्दजी महाराज के प्रवचन हुए। 

रामस्नेही सम्प्रदायाचार्य अनन्त श्रीविभूषित जगतगुरू स्वामीजी श्री रामदयालजी महाराज ने कहा है कि भारत की भूमि मानवी विशेषताओं की रद्यगर्भा रही है। विश्व में आध्यात्मिक वेदांत के प्रकाश को बिखरने में महाप्रभु रामचरणजी महाराज अग्रदूत थे। उन्होंने देश विश्व को सत्यपथ दिखाया। उनका जीवन चरित्र आज सबके लिए प्रेरणा स्त्रोत बन गया है। महाप्रभु रामचरण महाराज ने आध्यात्मिक, वेदांत, सौम्यता पूरे विश्व में फैलाकर सबके लिए एक मिसाल बन गए। 

रैवासा धाम के अग्रपीठाधीश्वर राघवाचार्य महाराज ने कहा कि राम नाम जप व तप से ही रामस्नेही संप्रदाय आज अपने चरम पर है। राम नाम यज्ञ सनातन संस्कृति में सबसे बड़ा यज्ञ है। हमें जो मानव जीवन मिला है यह धर्माचरण के लिए है। उन्होंने राम नाम सुमिरन का आव्हान करते हुए कहा कि धर्म का बीज ही राम नाम है। बिना त्याग के मनुष्य को कुछ नहीं मिलता है जो आदमी त्याग करता है, लोग उसे नमस्कार करते हैं तथा जो आदमी अपना स्वार्थ देखता है, उससे लोग दूर भागते हैं। जगतगुरू राघवाचार्य ने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति व वैदिक पंरपराओं को जड़ से उखाडने का कार्य हुआ था तब शंकाराचार्यजी महाराज ने दिग्विजय रथ यात्रा निकाल कर स्थान स्थान पर पीठ स्थापित की। जहां से आचार्य पंरपरा में मनुष्य को सम्यक रास्ता दिखाना ही संप्रदाय है। देश में धर्म सापेक्ष के बिना काम नहीं चल सकता है। देश की समस्याओं के समाधान के लिए संतों की दृष्टि से ही देखना होगा, भाई भतीजावाद से काम नहीं होगा। 

अमरज्ञान निरंजनी आश्रम शक्करगढ के महामंडलेश्वर अनन्त विभूषित स्वामीश्री जगदीशपुरीजी महाराज ने कहा कि शाहपुरा में महाप्रभु रामचरण की तपोस्थली रामनिवास धाम रामधाम दिव्य तीर्थ के समान है। विरक्तों की शरणस्थली रामधाम कोई साधारण धाम नहीं बल्कि दिव्य तीर्थ स्वरूप धाम है। इस धाम की विशेषता है कि यहां भारतवर्ष के विरक्त संत विश्राम के लिए ठहर कर श्रद्धालुओं को सानिध्य देते हैं। उन्होनें कहा कि ज्ञान वैराग्य को जागृत तपोबल से किया जा सकता है। आचार्यश्री जगदीशपुरी महाराज ने कि पृथ्वी पर जब भी अनाचार, दुराचार, पाप बढ़ता है और भक्तों पर संकट मंडराता है तो ईश्वर धरती पर अवतार लेकर दुष्टों का संहार करते हैं और भक्तों को तारते हैं। महाप्रभु स्वामी रामचरण महाराज भी इनमें से एक थे। 

अपरान्ह के सत्र में वेदान्ताचार्य सनातन आर्श विद्या प्रतिष्ठान इन्दौर के महामंडलेश्वर अनन्त विभूषित स्वामीश्री प्रणवानन्दजी महाराज, चिन्मय मिशन इन्दौर के अनन्त विभूषित स्वामीश्री प्रबुद्धानन्दजी महाराज के प्रवचन हुए। वरिष्ठ संत डा. रामस्वरूप शास्त्री के संचालन में हुए प्रवचन सभा में जोधपुर के संत रामशरण महाराज, आलोट के संत ईश्वरराम महाराज, बाड़मेर के संत सुखराम महाराज व पुष्कर के संत अमृतराम महाराज ने रामस्नेही संप्रदाय व महाप्रभु रामचरण महाराज के जीवन पर प्रकाश डाला।

इससे पूर्व रामस्नेही संप्रदाय के संतों की ओर से भजन संध्या का आयोजन किया गया जिसमें मंगलाचरण के साथ रामस्नेही भजनों की आकर्षक प्रस्तुति दी गई। केलवा के संत रामशरण जी महाराज के संचालन में हुई संध्या में संत जगदीशराम जी महाराज जावला, संत रामनिवास जी महाराज टोंक, संत दिग्विजयराम जी महाराज चित्तौड़, संत दिव्येशराम जी महाराज धलपट ने अपने भजनों की प्रस्तुति दी।

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