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महिला शिक्षक की गुमशुदगी और मौत पर पुलिस सवालों के घेरे में, फूटा गुस्सा, परिजनों ने स्टांप मंत्री को बैरंग लौटाया – वाराणसी

महिला शिक्षक की गुमशुदगी और मौत पर पुलिस सवालों के घेरे में, फूटा गुस्सा, परिजनों ने स्टांप मंत्री को बैरंग लौटाया

वाराणसी

तेलियाबाग क्षेत्र के रंगिया मोहल्ला निवासी युवा शिक्षिका की गुमशुदगी और मौत के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली ही सवालों के घेरे में आ गई है। एक तरफ जहां पूरे देश में युवती, किशोरी, महिलाओं के अपहरण की कोशिशें, बलात्कार और हत्या के मामले सामने आ रहे हैं, उसके मद्देनजर लगातार पुलिस पर ही सवाल उठाए जा रहे हैं। अक्सर ये सवाल किया जा रहा है कि महिलाओं और युवतियों के मामले में केस दर्ज करने में ही लापरवाही बरती जा रही है। मानवाधिकार आयोग से लेकर राजनीतिक दलों तक पुलिस की कार्यप्रणाली पर ही निशाना साध रहे हैं। बावजूद इसके पुलिस की ऐसे मामलों में लगातार शिथिलता ही बरत रही है। ऐसा ही सवाल अब बनारस पुलिस पर भी उठने लगा है। आम नागरिकों का सीधा सा सवाल है कि शिक्षिका 11 दिसंबर की शाम मलदहिया स्थित चर्च कंपाउंड में ट्यूशन पढ़ाने गई। लेकिन देर रात तक घर नहीं लौटी। ऐसे में परिवार वालों ने इसकी सूचना देने के लिए पहले चेतगंज थाने पहुंचे तो वहां से उन्हें सिगरा थाने जाने को कहा गया। सिगरा पहुंचने पर केस चेतगंज थाने का बताया गया। दो थानों के सीमा विवाद में 11 दिसंबर को गुमशुदगी दर्ज नहीं हुई। उधर परिवार वाले पूरी रात परेशान रहे। अगले दिन भी वो थानों के सीमा विवाद में ही फंसे रहे। खैर किसी तरह क्षेत्रीय पार्षद के प्रयास पर 12 दिसंबर को सिगरा थाने में गुमशुदगी दर्ज हुई। लेकिन पुलिस एक युवती की गुमशुदगी दर्ज कर चौन से बैठ गई। उसकी तलाशी का कोई प्रयास नहीं किया गया। इसी बीच चौबेपुर के ढकवा गांव में गंगा में एक युवती का शव उतराया हुआ मिला। फिर भी पुलिस शांत रही। सवाल यह उठाया जा रहा है कि जिले के एक थाना क्षेत्र से एक युवती गायब है और जिले के ही एक थाना क्षेत्र में एक युवती का शव मिलता है तो क्या पुलिस का यह कर्तव्य नहीं बनता कि वह गायब युवती के परिजनों को बुला कर शिनाख्त कराने की कोशिश करते। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। चौबेपुर के ढकवा गांव में गंगा में उतराए मिले युवती के शव की सूचना 14 दिसंबर की सुबह मीडिया में आने के बाद खुद परिवार के लोग दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल पहुंचते हैं और युवती की शिनाख्त करते है। युवती की शिनाख्त के बाद परिवार के लोग उसका शव तेलियाबाग तिराहे पर रख कर जाम लगा देते हैं, तब जा कर पुलिस हरकत में आती है। लोगों का कहना है कि युवती 11 दिसंबर को गायब हुई और 14 दिसंबर को परिजन खुद जिला अस्पताल की मर्चरी में जा कर शिनाख्त करते हैं, क्या इसे पुलिस की लापरवाही न माना जाए। एक तो गुमशुदगी दर्ज करने में एक दिन सीमा विवाद में बिता दिया गया, उसके बाद भी कोई तलाशी नहीं हुई और युवती का शव 13 दिसंबर को मिला तब भी पुलिस हरकत में नही आई। ऐसे में लोगों का गुस्सा फूटा और वे 14 दिसंबर की शाम तेलियाबाग तिराहे पर जमा हो गए। वो युवती के अपहरण, रेप और हत्या का आरोप लगाने लगे। पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। युवती के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार युवती के सिर में चोट के निशान हैं। बताया जा रहा है कि गंगा में डूबने से उसकी मौत हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेप की पुष्टि नहीं हुई है। अब सिगरा और चेतगंज पुलिस की इस घोर लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए जिले के कप्तान प्रभाकर चौधरी आगे आए हैं। वह 14 दिसंबर से ही लगातार स्त्रिरय हैं। 15 दिसंबर की सुबह ही वह सिगरा थाने पहुंचे और देर तक थाने में बैठ कर पूछ-ताछ और शहर के तिराहों और चौराहों पर लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले में जुट गए। सूत्रों के मुताबिक तेलियाबाग के रंगिया मोहाल से महदहिया चर्च कंपाउंड तक के सभी सीसीटीवी कैंमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। कहा तो यह भी जा रहा है कि पुलिस मैदागिन से राजघाट तक के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रही है। युवती के 11 दिसंबर के लोकेशन को तलाशने में जुटी पुलिस को अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है।

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