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माननीय राज्यपाल से मिलने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का मीडिया इंटरेक्शन

माननीय राज्यपाल से मिलने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का मीडिया इंटरेक्शन 

आखिर में मज़बूरी में हाईकमांड को फैसला करना पड़ा। क्योंकि पिछले काफी लम्बे अरसे से भारतीय जनता पार्टी जो षड्यंत्र कर रही थी जिसका आगाह मैंने कई बार किया कि षड्यंत्र बहुत बड़ा षड्यंत्र है, हॉर्स ट्रेंडिंग का षड्यंत्र है और उसमें हमारे किसी नेता को ट्रेप में नहीं आना चाहिए। यह पिछले 6 महीने से षड्यंत्र चल रहा था और हम सबको जानकारी थी कि यह षड्यंत्र बहुत बड़ा है, हॉर्स ट्रेडिंग हो रही है और यह चलता रहा, चलता रहा और जो स्थिति आज पहुंची है उसी कारण पहुंची है। हमारे कुछ साथी गुमराह होकर के चले गए दिल्ली के अंदर और बीजेपी के मंसूबे पूरे नहीं हुए उन्होंने जो कुछ भी खेल खेला था धनबल के आधार पर, जैसे कर्नाटक के अंदर, मध्यप्रदेश के अंदर राजस्थान में वही करना चाहते थे वो लोग। खुला खेल था, खुला खेल था और मैं समझता हूँ कि उस खुले खेल में वो लोग मात खा गए क्योंकि जनता भी समझ गई है, जनता का बहुत बड़ा प्रेशर है विधायकों पे जो गए हैं वहां उन पर बहुत बड़ा प्रेशर है कि आपको हमने चुनाव जिता कर भेजा पांच साल के लिए, मध्यप्रदेश में भी यही हो रहा है कि आप पांच साल के लिए जीतकर गए, डेढ़ साल में वापस क्यों आ रहे हो? तो यह जो स्थितियाँ बनी है देश के अंदर बहुत खतरनाक स्थिति है मैं बार-बार कहता हूँ और मैं दुखी होकर कहता हूँ, दुखी होकर कहता हूँ कि जिस रूप में हॉर्स ट्रेडिंग हो रही है देश के अंदर पहली बार आजादी के बाद में ऐसी गवर्नमेंट आई है देश के अंदर जो धनबल के आधार पर सरकारों को तोड़ रही है, मरोड़ रही है और टॉपल कर रही है। आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ पहली बार देश खतरे में आ रहा है डेमोक्रेसी के लिए, 70 साल हो गए सरकारें बदली है पर डेमोक्रेसी मजबूत हुई है क्योंकि सरकारें बदली है स्मूथली बदली है। इंदिरा जी चुनाव हार गई, राजीव जी चुनाव हार गए यह सब कुछ हुआ है देश ने देखा है कोई तरह की हलचल भी नहीं हुई जो जनता ने दिया फैसला शिरोधार्य है हमें, और सरकार के मुख्यमंत्री बदले, प्राइम मिनिस्टर बदले यह तो देश और हमने देखा है 70 साल में। पाकिस्तान में ऐसा नहीं होता था, पाकिस्तान में सैनिको का शासन बार-बार होता था। पहली बार धनबल के आधार पर, धनबल भी मामूली नहीं 20,25,30,35 पता नहीं क्या हो रहा है देश के अंदर। विश्वास भी नहीं होता अभी तक करोड़ों रूपये की इस प्रकार की ट्रेडिंग हो रही है, देश किधर जायेगा? 

आखिर में हमने पूरा मौका दिया कल मीटिंग करी विधायक दल की वो लोग नहीं आए, आज फिर मीटिंग उन्हीं लोगों के लिए रखी गई एक प्रकार से कि एक मौका और देंगे हो सकता है ईश्वर उनको सद्बुद्धि दे आ जाएंगे वो लोग, तब भी वह नहीं आए। उसमें से आठ-दस लोग आना चाहते थे जो हमारे पास में इत्तला आ रही थी उनके लिए इतना पुलिस का इंतजाम है और यह कोई हमारे प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जो पहले थे पायलट साहब उनके हाथ में कुछ नहीं है वहां पर वह तो खुद ही वहां पर जो पूरा कुनबा जो है वह बीजेपी के हाथो में खेल रहे है, रेजॉर्ट की व्यवस्था बीजेपी की है, मैनेजमेंट बीजेपी का है। जो लोग मैनेजमेंट के लिए बाहर से आये है वह जो मध्यप्रदेश के वक्त में कर रहे थे वही मैनेजमेंट अब कर रहे है वो लोग, वही टीम वापस लग गई है क्योंकि उनका पहले का अनुभव हो गया इस रूप में वहां पर पूरा खेल चल रहा है।

तो आप सोच सकते है ऐसे खेल के अंदर आखिर में सरकार के सामने चारा क्या है? सरकार को गुड गवर्नेंस देनी है, जो हमने वादा किया है जनता से वादे निभाए यहां इन झगड़ो में पड़ें रहें? आज कोविड आ गया था जान लगा दी हम लोगों ने, रात-दिन एक कर दिए, जनता ने पूरा साथ दिया हमारा, तमाम दलों के लोगों ने साथ दिया बीजेपी के हो चाहे कांग्रेस के हो सब विधायक लग गए, दानदाताओं के सहयोग से,भामाशाहों के सहयोग से एक आदमी भूखा नहीं सोएगा यह मेरा नारा था। मुझे ख़ुशी है, गर्व है राजस्थान के एक-एक परिवार ने एक-एक नागरिक ने इसको निभाया कोई भूखा नहीं रहा। हमने कैश बांटा, गेहूं बांटे लोग खुश हैं। यह लड़ाई आज भी खत्म नहीं हुई है, कोरोना खत्म नहीं हुआ है कब किसके लग जाये, कब किसकी मृत्यु हो जाये पता ही नहीं लगेगा, यह तो हमने 40 हजार टेस्ट करने की व्यवस्था कर ली है उसके कारण कॉन्फिडेंस के अंदर है। ऐसे वक्त में किसी की हिम्मत होना सरकार गिराने की आप सोचिये दुर्भाग्यपूर्ण है कि नहीं है? इसलिए मजबूर होकर के आज, हमें कोई ख़ुशी नहीं है मजबूर होकर के हमारे तीन साथी, मैंने उनकी कोई शिकायत नहीं की हाईकमांड से कि इनको हटाओ, उसके बावजूद भी उनका जो रवैया रहा है तीन महीने से, छह महीने से आज देखते हो आप आ बैल मुझे मार जो कहावत हैं उस रूप में पेश किया इन्होंने अपने आप को, रोज ट्वीट करते रहते हैं, रोज स्टेटमेंट देते रहते हैं। मुख्यमंत्री जब तक कोई व्यक्ति है तब तक उनके मंत्रिमंडल के साथियों का यह कर्तव्य होता है आम जनता की भावनाओं को समझे, सरकार एकजुट रहे और केबिनेट में वो सब लोग मेरे सहयोगी होते हैं, बॉस कोई नहीं होता हैं इस रूप में ट्रीट किया मैंने सबको। नंबर तीन जो विधायक आये हैं जीत कर किसी ग्रुप का हो, कितने नजदीक हो मैंने सबके काम किये, कोई भेदभाव नहीं किया वह खुद जानते हैं उनका दिल जानता हैं। कॉलेज खोलना हैं, SDO ऑफिस खोलना है, सड़क बनानी हैं जो माँगा उन्होंने मैंने दिया है बजट के अंदर उसके बाद में भी उनको ले गए इस प्रकार से मैं समझता हूँ कि आज का माहौल है या जिस प्रकार से फैसले हुए हैं। ख़ुशी किसी को नहीं हैं ना हाईकमांड को ख़ुशी है। पूरे प्रयास कर लिए उसके बाद में जब देखा गया इन्होने तय कर लिया है बीजेपी के साथ में सौदे हो चुके है और ये नई पार्टी बनायेगे, पहले कहते बीजपी में जायेगे लोग तैयार नहीं हो रहे तो नई पार्टी बना लेंगे, तो पार्टी तोडना संविधान के अंतर्गत, कानून के अंतर्गत वह भी लिखा हुआ है एंटी डिफेक्शन बिल है दो-तिहाई होते हैं तो जाकर आप पार्टी तोड़ सकते हो, बीस लोगों से पार्टी नहीं टूटती है। आज जो उन्होंने खेल खेला है दो-तीन दिन से आप बताये 122 लोग हमारे पास में है, 107 कांग्रेस के है आप समझ सकते है दो तिहाई कितने होते है। तो इन्होने यह क्यों यह खेल खेला? और आप ब्लेकमेल कर रहे हो, आप असेम्बली के अंदर फ्लोर टेस्ट होना चाहिए कह रहे है कल से मैं सुन रहा हूँ, उनमें इतनी तो भगवान ने बुद्धि दी है कि कांग्रेस का कोई MLA यह मांग कभी नहीं कर सकता वह यह कह सकता है विधायक दल की मीटिंग बुलाओ, हमारा विश्वास नहीं है मुख्यमंत्री पर, वहां हम अपनी बात कहेंगे अगर बहुमत साथ नहीं होगा मुख्यमंत्री का तो इस्तीफा देना पड़ेगा, यह मांग करना तो वाजिब मांग होती है। अपनी पार्टी की विधायक दल की मीटिंग के अंदर हाई कमांड का ऑब्जर्वर आता हैं, सबकी बात सुनता है फिर फैसला करता हैं। यह कहा लिखा हुआ है कि आप विधानसभा में मांग कर रहे हैं इसका मतलब क्या हैं? कि बीजेपी के सहयोग से हम सरकार गिराएंगे। सुप्रीम कोर्ट का आदेश स्पष्ट हैं जिसकी मंशा हो जाती हैं मुझे मेरी पार्टी के खिलाफ में जाना हैं उसकी मेंम्बरशिप खत्म हो जाती हैं। धन्यवाद।

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