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मानसून पूर्व शाहपुरा के जीवनदायिनीे ऐतिहासिक पिवणिया तालाब के पेटाक्षेत्र में हो खुदाई-भीलवाडा

मानसून पूर्व शाहपुरा के जीवनदायिनीे ऐतिहासिक पिवणिया तालाब के पेटाक्षेत्र में हो खुदाई
खुदाई होने से शहर के पंरपरागत जल स्त्रोतों का बढ़ेगा जल स्तर, खुदाई की मिट्टी दे काश्तकारों को ताकि खेत हो उपजाउ
एसडीएम श्वेता चोहान ने दिया आश्वासन, खुदाई के साथ तालाब में पानी की आवकों को भी खोला जाएगा 
शाहपुरा-(मूलचन्द पेसवानी)
शाहपुरा में रियासतकाल के समय से जीवनदायिनी के रूप में स्थित पिवणिया तालाब के पेटा क्षेत्र में मानसून के पूर्व मिट्टी की खुदाई कराने, पेटा क्षेत्र की खुदने वाली मिट्टी काश्तकारों को उनके खेतों को उपजाउ बनाने के लिए देने व तालाब में मानसून से पूर्व ही पानी की आवकों का खुलासा कराने के संबंध में जीव दया सेवा समिति के प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम आईएएस श्वेता चोहान से मुलाकात की। चोहान को इस संबंध में ज्ञापन देकर कहा कि 15 दिन बाद में मानसून सक्रिय हो जायेगा, यह कार्य प्राथमिकता से अभी हो जाना चाहिए। इस पर चोहान ने आश्वासन दिया कि खुदाई के साथ पानी की आवकों को खोला जायेगा तथा शहर के किसी भी हिस्से से गंदे पानी का बहाव तालाब में न हो, ऐसा भी बंदोबश्त किया जायेगा। एसडीएम से मुलाकात करने वालों में जीव दया सेवा समिति के संयोजक अत्तू खां कायमखानी, आर्य समाज शाहपुरा के उप प्रधान रामस्वरूप काबरा, शाहपुरा राजपरिवार के ओएसडी ओमप्रकाश सेन भी थे। तीनों ने विस्तार से एसडीएम से इस संबंध में चर्चा कर इस कार्य को मानसून से पूर्व ही कराने को कहा।
जीव दया सेवा समिति के ज्ञापन में कहा गया है कि तालाब की गहराई के प्रतिवर्ष कम होने के कारण अब उसमें पानी के भराव की क्षमता भी कम हो रही है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि अविलंब इसकी खुदाई की जाए तथा खुदाई से निकलने वाली मिट्टी को बिना किसी रोकथाम के क्षेत्र के काश्तकारों को उनकी खेतों की जमीन को उपजाउ बनाने के लिए निःशुल्क दिया जाए, ऐसा होने पर राज्य की कल्याणकारी सरकार की भावना के अनुरूप प्रशासन के मार्गदर्शन में एक सकारात्मक कार्य होगा। 
ज्ञापन में कहा गया है कि स्थानीय प्रशासन की उदासीनता के चलते इस दिशा में लंबे समय से न तो विचार किया गया है तथा न ही कोई योजना का खाका तैयार किया है। इसलिए कार्य संपादित होने पर यह पिवणिया तालाब जीवनदायिनी के रूप में न केवल परंपरागत जल भंडार का केंद्र बना रहेगा वरन यहां पानी का भराव बढ़ने से यह स्थल रमणिक होकर विदेशी पक्षियों की आवाजाही का केंद्र भी बन सकेगा, ऐसा अतीत में रहा है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि शाहपुरा रियासत काल में लगभग 375 वर्ष पूर्व से तत्कालीक शासकों ने शाहपुरा कस्बे में जलापूर्ति के प्रमुख परंपरागत जल स्त्रोत क्षीरसागर, पिवणिया तालाब, नूरघाट बनाकर उस समय में अपनी वैज्ञानिक, तकनीकी बुद्विमता का परिचय दिया था। यह निर्माण व क्षेत्रफल की दृष्टि से जिले में मिसाल है। इसकी बनावट व इसमें वर्षा के पानी की आवकों को भी इस प्रकार से तैयार किया गया है कि वर्षभर पानी भर रह सकता है। प्रकृति प्रदत्त वर्षा की एक एक बूंद का इसमें संरक्षण होता है तथा एक भी बूंद व्यर्थ जाने की कोई संभावना नहीं है। वर्तमान में स्थानीय प्रशासन की उदासीनता व लापरवाही के चलते इस परंपरागत जलस्त्रोत के महत्व को नकारते हुए इसमें मलबा, गंदगी, कचरा, मल मूत्र तक डाला जा रहा है। ध्यान नहीं दिये जाने के कारण इस जल स्त्रोत के अंदर व पेटाक्षेत्र में जगह जगह विलायती बबूल उग गये है जिससे इसके स्वरूप का वर्तमान में जल भंडार कहना भी गलत साबित हो रहा है।
एसडीएम चोहान को ज्ञापन में बताया गया कि वर्तमान में इस परंपरागत जल स्त्रोत का अधिकांश भाग सुखा है। जलस्त्रोत के दो तरफ पानी के सुख जाने से विलायती बबूलों के होने से यह जंगल का स्वरूप ले चुका है। पानी की आवकों में भी जगह जगह अवरोध होने से वर्षा का पानी भी पूरी मात्रा में तालाब में नहीं आ पा रहा है। सुखे क्षेत्र से मिट्टी खुदाई का कार्य नगर पालिका के माध्यम से कराया जाए। पालिका के पास अपनी स्वयं की जेसीबी होने से खुदाई का कार्य उसके माध्यम से कराकर मिट्टी परिवहन निःशुल्क ही काश्तकारों को देेने की सार्वजनिक सूचना जारी करा दी जाए तो काश्तकार अपने अपने वाहनों से जेसीबी से खुदी मिट्टी को उठाकर अपने खेतों में ले जायेगें जिससे कार्य की गति काफी तेज हो जायेगी तथा इस तालाब की खुदाई कुछ ही दिनों में संभव हो जायेगी। खुदाई होने व पानी की सभी आवकों का खुलासा समय रहते हो जाता है तो मानसून में आने वाला वर्षा का पानी सीधे तालाब की भराव क्षमता को दुगुना कर सकता है।
ज्ञापन में यह भी सुझाव दिया गया है कि यदि इस मिट्टी खुदाई कार्य को नगर पालिका अपने स्तर पर कराकर वहीं पेटाक्षेत्र में एक स्थान पर ढेर के रूप में जमा देवें तो उसे एक टापू के रूप में भी विकसित किया जा सकता है। हालांकि यह कार्य बड़ा है, किसी आर्किटेक्ट से इसकी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कराकर कार्य को अंजाम दिया जा सकता है। ऐसा होने पर शाहपुरा में जो लंबे समय से एक आकर्षक उद्यान व रमणिक स्थल की कमी महसूस की जा रही है, उसकी पूर्ति संभव हो सकेगी। इसी मिट्टी से उस टापू पर आने जाने का रास्ता भी बनाया जा सकता है फिर वहां शहर की सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से पौधरोपण का कार्य करवाया जाकर उसे पूरा किया जा सकता है। 
ज्ञापन में कहा गया है कि राजपरिवार का शाहपुरा में रियासतकाल से जनहित में कार्य करने में विश्वास रहा है, जल संरक्षण के लिए शाहपुरा ब्लॉक के नाहरसागर बांध, उम्मेदसागर बांध व पिवणिया तालाब के कार्य जो कराये गये है, उसी कड़ी में वर्तमान में लोकतंत्र के शासन में उपरोक्त अनुसार कार्य कराया जाता है तो यहां की जनता लाभान्वित होगी। यहां की जनता के लिए पीने के पानी की समस्या भी समाप्त होगी क्योंकि पिवणिया तालाब में भराव क्षमता बढ़ेगी तो यहां नगर पालिका क्षेत्र के जितने भी सार्वजनिक व पारिवारिक जलस्त्रोत कुएं बावड़ी है सभी का जल स्तर पर भी बढ़ेगा तो जल संकट से भी गर्मी के मौसम में बचा जा सकेगा।
जीव दया सेवा समिति के संयोजक अत्तू खां कायमखानी, आर्य समाज शाहपुरा के उप प्रधान रामस्वरूप काबरा, शाहपुरा राजपरिवार के ओएसडी ओमप्रकाश सेन ने बताया कि एसडीएम श्वेता चोहान ने उनके ज्ञापन में उठायी बातों को सकारात्मक लेते हुए शीघ्र ही नगर पालिका के सहयोग से कार्य योजना बनाकर अविलंब कार्यवाही का आश्वासन दिया है। उन्होंने उम्मीद जतायी है कि यह कार्य होने पर शहर में पीने के पानी की समस्या का भी समाधान हो सकेगा।

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