Home / राजस्थान / भीलवाड़ा / यदि स्त्री परतन्त्र है तो पुरुष स्वतः परतन्त्र है-संकल्प की मित्र काव्यगोष्ठी भीलवाड़ा

यदि स्त्री परतन्त्र है तो पुरुष स्वतः परतन्त्र है-संकल्प की मित्र काव्यगोष्ठी भीलवाड़ा

यदि स्त्री परतन्त्र है तो पुरुष स्वतः परतन्त्र है-संकल्प की मित्र काव्यगोष्ठी

भीलवाड़ा – मूलचन्द पेसवानी

भीलवाड़ा की अग्रणी अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था संकल्प की ओर से गुरूवार को चित्तोड रोड़ स्थित कमला एन्क्लेव में कवियों की काव्यगोष्ठी का अनूठा आयोजन किया गया। जिसमें सभी कवियों ने एक से बढकर एक देशभक्ति, प्रेम, श्रंगार, जीवन दर्शन, हास्य-व्यंग्य एवं समसामयिक विषयों पर सार्थक संदेश देती रचनाओं की प्रस्तुति देकर इस आयोजन को श्रेष्ठता प्रदान की। 

अध्यक्षता राधेश्याम गर्ग अभिनव ने की। मुख्य अतिथि राजेंद्रगोपाल व्यास, विशिष्ट अतिथि डॉ कमलाकांत, जीपी पारीक व इन्जी.एसएस गम्भीर थे। काव्यगोष्ठी का संचालन किया संस्था महासचिव डॉ एसके लोहानी खालिस ने और शुभारंभ नरेंद्र दाधीच की सुमधुर सरस्वती वंदना व अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्जवलन से हुआ।

संकल्प महासचिव डॉ एसके लोहानी खालिस ने बताया कि काव्यगोष्ठी की शुरुआत योगेन्द्र सक्सेना योगी के गीत मच गया शोर फागोड़े-फागोड़े फाग चहुँ ओर, बंशी पारस ने श्तिनका आँख में पड़ जाए तो तलवार बन जता है, डॉ एसके लोहानी खालिस ने यदि स्त्री कहीं परतन्त्र है तो पुरुष स्वतः परतन्त्र है व ये कौनसे मजहब हैं जो इंसानियत का ना एहतराम करें, राधेश्याम गर्ग अभिनव ने जब भी मैखाने से पीकर हम चले,साथ लेकर सैंकड़ों आलम चले, अरुण अजीब ने तेरे पहलू में आना चाहती है,गजल फिर गुनगुनाना चाहती है, नरेंद्र दाधीच ने ईंट-पत्थरों से बने भव्य मकान, घर बनाने को चाहिए नारी की मुस्कान, जीपी पारीक ने आग लगाकर बाग में बद न करो शाहीन, ऊँचा उड़ता बाज जो होता बड़ा कुलीन, पुनीता भारद्वाज ने ना निकलो नीड़ से बुलबुल परिंदे बाज बैठे हैं, संतोष जोशी ने श्क्या कुसूर था तुम्हारा अहिल्या कि तुम बहुरूपिये पुरुष को पहचान न सकीश्, एसएस गम्भीर ने श्अगर आपको घुटनों में दर्द है तो बैंक लोन लीजिए सरीखी गहन रचनाओं की प्रस्तुति देकर काव्यगोष्ठी को परवान चढ़ाया।

इसी प्रकार राजेंद्रगोपाल व्यास ने बताशों को टॉफी समझते थे वहां से उठे हैं,आज संपन्नता में भी लोग रुठे हैं, दिनेश दीवाना ने अरी ठुमक-ठुमक मत चालै गोरी, अठी-उठी मत नालै गोरी, ओम उज्जवल ने अंकुरित करना सदगुण देना अद्भुत जीवन शैली है, परवाना अजमेरी ने श्प्यार कर लेने दे दिलबर कि आज होली है, जनोतन वार दूँ तुझपर कि आज होली है और डॉ कमलाकांत ने पलाश की टहनी पर नाचती-मुस्कुराती फूल की पंखुडी-सा मैं भी उल्लास में डूबकर झूम-झूम जाऊं बसंत जैसी नायाब रचनाओं के माध्यम से मानवता को सार्थक संदेश दिए। 

अंत में अध्यक्षता कर रहे राधेश्याम गर्ग अभिनव ने भीलवाड़ा के इतिहास ऐसी अद्भुत व अनूठी काव्यगोष्ठी की भूरि-भूरि प्रशंसा की और आयोजक इंजी.एसएस गंभीर ने सबके प्रति आभार व्यक्त किया।

Support us

कोई भी मीडिया हो उन्हें कभी फंड की चिंता नहीं करनी पड़ती क्यूंकि लोकतंत्र को बचाने के नाम पर उन्हें विभिन्न स्रोतों से पैसा मिलता है। लेकिन हमें सच की लड़ाई लड़ने के लिए आपके समर्थन की आवश्यकता है। आपसे जितना हो सके हमें योगदान करें ताकि हम आपके लिए आवाज उठा सकें।

Donate with

Check Also

भीलवाड़ा जिला कलेक्टर पहुंचे मृतकों के घर परिजनों को दी सांत्वना, सौंपे सीएम सहायता राशि के चेक

चित्तौड़गढ़-कोटा राष्ट्रीय राजमार्ग दुर्घटना भीलवाड़ा जिला कलेक्टर पहुंचे मृतकों के घर परिजनों को दी सांत्वना, …

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *