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ये पत्थर सबूत है की 180 करोड़ साल पहले थार मरुस्थल की जगह था समुद्र

पंकज वैष्णव . उदयपुर . पर्यटन, झीलें और विरासत के नाम से विख्यात झीलों की नगरी अपने में और भी कई महत्व समेटे हुए हैं। उन्हीं छिपे हुए महत्वों में से एक है भू-विज्ञान संग्रहालय। ज्यादातर शहरवासी नहीं जानते की यहां स्थित भू विज्ञान संग्रहालय प्रदेश का सबसे पुराना म्यूजियम और पृथ्वी विज्ञान की बड़ी धरोहर है। यहां प्रदेश ही नहीं, वरन देश-दुनिया की बेशकीमती धरोहर है। यहां कई तरह के खनीज, जीवाश्म, शैवाल, चट्टानें हैं, जो पृथ्वी की उत्पत्ति से लेकर वर्तमान तक भू-गर्भ के हालात बयां करते हैं।वर्ष 1950 में उदयपुर में भू विज्ञान विभाग का गठन हुआ था। स्थापना तत्कालीन प्रोफेसर केपी. रोडे ने की। लिहाजा यहां स्थापित संग्राहलय का नाम भी उन्हीं के नाम पर रखा गया है। मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के सांइस कॉलेज के साथ चलने वाले भू विज्ञान विभाग का ‘रोडे म्यूजियम’ प्रदेश का सबसे पुराना भू विज्ञान संग्रहालय है। भू विज्ञान विषय पढऩे वाले विद्यार्थियों के लिए रोडे म्यूजियम का इतना महत्व है कि देशभर से विद्यार्थी अवलोकन करने आते हैं। मानते हैं कि उदयपुर के इस म्यूजियम का अवलोकन नहीं किया तो भू विज्ञान की पढ़ाई ही अधूरी है।…

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