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रामस्नेही सम्प्रदाय का उदेश्य राष्ट्र का मंगल करना है-भीलवाड़ा

रामचरण प्राकट्य महोत्सव चढ़ा परवान पर, देश व दुनियां से पहुंच रहे रामस्नेही अनुरागी 

रामस्नेही सम्प्रदाय का उदेश्य राष्ट्र का मंगल करना है, रा से राष्ट्र और म से मंगल होता है- आचार्य रामदयाल

सत्ता व धर्म ध्वजा के समन्वय से ही आतंकवाद से छुटकारा -जगतगुरू

रामनिवास धाम में कथा सुनने के लिए उमड़ा सैलाब

शाहपुरा (भीलवाड़ा)- मूलचन्द पेसवानी 

भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा स्थित रामनिवास धाम में रामस्नेही संप्रदाय के जन्मदाता महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज के सात दिवसीय प्राकट्य त्रिशताब्दी समारोह में मंगलवार को दिन भर विविध कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। बारादरी में आरती वंदना, महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज के समाधि स्तंभजी के दर्शन, वाणी का पाठ हुआ। सांयकाल यहां परिसर में बनाये गये विशाल पांडाल में प्रवचन व धर्मसभा का आयोजन हुआ जिसमें पांडाल खचाखच भरा रहा। 

रामस्नेही सम्प्रदायाचार्य अनन्त श्रीविभूषित जगतगुरू स्वामीजी श्री रामदयालजी महाराज की अध्यक्षता में आयोजित प्रवचन व धर्मसभा में महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज के प्राकट्य त्रिशताब्दी समारोह में मंगलवार को प्रवचन सभा में रेण रामस्नेही संप्रदायाचार्य अनन्त विभूषित स्वामीजी हरिनारायण जी महाराज के उत्तराधिकारी संत सज्जनराम महाराज, अखंड धाम इन्दौर के महामंडलेश्वर डा. चैतन्यस्वरूप जी महाराज, मंगाना के चेतनदासजी तथा जगतगुरू रामानन्दाचार्य स्वामी जी रामाचार्यजी महाराज अहमदाबाद व डाकोर गुजरात के नरहरि सेवा आश्रम के महंत देवकीनन्दनदास महाराज, भक्तिस्वरूपा स्वामिनी परमानंदाजी सरस्वती गोधरा, दिगम्बर अणी अखाड़ा के महंत श्री रामकिशोरदासजी महाराज नासिक की गरीमामय मौजूदगी रही। सभी धर्माचार्यो का संतों व रामनिवास धाम के रामस्नेही अनुरागियों द्वारा स्वागत सम्मान किया गया। इसके अलावा संत तोताराम महाराज खाचरोद, संत कीर्तिराम महाराज अहमदाबाद, संत सुखरामदास महाराज कदम खंडी व संत रामविनोद महाराज हरिद्वार के भी प्रवचन भी हुए। 

अन्तर्राष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के पीठाधीश्वर जगतगुरू आचार्यश्री रामदयाल महाराज ने कहा कि देश में सत समाज हमेशा राष्ट्र की दिशा तय करने व दशा सुधारने में आगे रहा है। रामस्नेही सम्प्रदाय का उदेश्य केवल माला फेरकर राम जपना ही नहीं है बल्कि राष्ट्र का मंगल भी करना है। रा से राष्ट्र और म से मंगल होता है। आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि राम व राष्ट्र के लिए समर्पण जरूरी है। राजनीति में नैतिक गिरावट पर कहा कि अब समय आ गया है कि राजनीति पर धर्म का अंकुश हो। सत्ता व धर्म ध्वजा के समन्वय से ही आतंकवाद से छुटकारा पाया जा सकता है। संसद से सड़क तक व्याप्त आतंकवाद की काली छाया हटाने के लिए राम नाम स्मरण जरूरी है। आचार्यश्री ने जोरदेकर कहा कि प्राकट्य महोत्सव की यह प्रवचन धर्म सभा, राष्ट्रीय समस्याओं के निवारण हेतु जन जागरण का नवाचार है। उन्होंने कहा कि हमें सकारात्मक सोच रखनी पड़ेगी तथा नकारात्मक सोच से दूर रहने के लिए कहा। उन्होंने राजनीति में शुचिता व स्वच्छता का समर्थन करते हुए राजधर्म को जिंदा रखते हुए हमारे संविधान को मानने की पैरवी की। 

जगतगुरू रामानन्दाचार्य स्वामी जी रामाचार्यजी महाराज अहमदाबाद ने कथा श्रवण के लिए उमड़े जनसैलाब को संबोधित करते हुए कहा कि सदाचारी व्यक्ति सदा सुखी रहता है। दुखी वही होता है जो दूसरों की प्रगति को देखकर ईर्ष्या करता है। स्वामी जी रामाचार्यजी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि रामचरितमानस में तुलसीदास ने संपूर्ण महाकाव्य का सार राम नाम ही बताया है। हमें जीवन में इसका ध्यान रखकर जाप करना होगा। संसार में राम नाम ही सत्य है इसलिए अंत समय में भी केवल राम नाम सत्य कहते हैं। उन्होंने बताया कि जीवन में अगर सुखी रहना है तो व्यसन और फैशन को त्यागना होगा यह हमारे दुखों के कारण है इसको हमारे जीवन में उतारना होगा।उन्होंने बताया कि ब्रह्म ही निर्दोष है और बाकी सब दोषी हैं। इतिहास में तथ्यों को मिलाना पड़ता है। अध्यात्म में सत्य को मिलाना पड़ता है। इसलिए सत्य को समझना आवश्यक है। संसार में विचार बहुत होते हैं। लेकिन स्वीकार बहुत कम होते हैं। सत्य को स्वीकारना सत्संग है। कान्ता की आशक्ति भक्ति का एक प्रकार है। राम नाम जपने वालों के लिए नाम मंत्र जरूरी है। परम तत्व की प्राप्ति हो जाए तब भी हमें यज्ञ, तप और दान को कभी नही छोड़ना चाहिए। चित्त प्रसन्न रहे वही परमात्मा के दर्शन का द्वार है। भरत वही है जो सबका पोषण करे और किसी का शोषण नहीं करे। ऐसा नहीं करने वाले पर मंत्र काम नहीं करेगा। किसी से शत्रुता या कटुता ना रखे वो शत्रुघ्न है। 

अखंड धाम इन्दौर के महामंडलेश्वर डा. चैतन्यस्वरूप जी महाराज ने कहा कि जीवन बड़ा मूल्यवान है और विश्वास कभी निराश नहीं होता है। कोई किसी के पास बिना काम के नहीं जाता है। संसार में ऐसा कोई नहीं है जिसने भूल नही की हो। संत को कोई पापी दिखाई ही नही देता है। कई प्रकार की मृत्यु ने हमें घेर रखा है लेकिन कोई रत्ना मिल जाए तो जीवन का उद्धार हो जाता है। चित्त प्रसन्न रहे वही परमात्मा दर्शन का द्वार है। संशय मौत है और विश्वास जीवन है। स्वामी देवकीनंदन दास महाराज डकोर ने कहा कि मुक्ति प्राप्त करने का एक ही उपाय है राम नाम के प्रति निष्ठा राम नाम के जाप से मोहे मध्य दूर हो जाते हैं और व्यक्ति भवसागर पार हो जाता है। 

विविध संस्कृतियों का समागम-

महाप्रभु रामचरण प्राकट्यमहोत्सव में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेष, बिहार, दिल्ली सहित अन्य शहरों से आए श्रोता कथा आनंद रस लूट रहे हैं। वहीं जिले के ग्रामीणांचलों से आने वाला जन सैलाब भी कथा सागर में समाकर संस्कृतियों का मेल करा रही है। कही ठेट देहात की बोली कानों में गूजं रही है तो कही गुजराती, राजस्थानी, मराठी व मेवाती रामचरण प्रसंगों की चर्चा का जरिया बनी हुई है। कथा से पूर्व आस पास के गांवों से लोगों के पहुंचने को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। दूर दराज से भी लोग हजारों की संख्या में कथा स्थल पर पहुंच रहे है। कई निशक्तजन भी व्हील चेयर एवं अन्य शहारों से कथा श्रवण को आ रहे है। हर आयु वर्ग के लोग कथा सुनने पहुुच रहे हैं।

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