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‘रिंग ऑफ फायर’- भारत में रविवार को दिखाई देने वाले सूर्य ग्रहण को यह नाम भी दिया गया है

‘रिंग ऑफ फायर’- भारत में रविवार को दिखाई देने वाले सूर्य ग्रहण को यह नाम भी दिया गया है

‘रिंग ऑफ फायर’- भारत में रविवार को दिखाई देने वाले सूर्य ग्रहण को यह नाम भी दिया गया है। चांद के पृथ्वी और सूरज के बीच आने से ग्रहण होना कोई अनोखी बात नहीं है लेकिन इस बार की यह खगोलीय घटना बेहद खास है। दरअसल, इस बार चांद सूरज को पूरी तरह से ढकेगा नहीं बल्कि सूरज उसके पीछे से झांकता रहेगा। यह नजारा आग के चमकदार छल्ले जैसा नजर आने वाला है और इसलिए इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ (Ring of Fire) का नाम दिया गया है। (सभी तस्वीरें: NASA)

भारत में रविवार यानी 21 जून को सुबह 9 बजकर 56 मिनट से शुरू होकर ग्रहण 3 घंटे 26 मिनट तक दिखाई देगा। इस दौरान कुछ जगहों पर सूरज 99.4% तक छिप जाएगा। इस बार चांद की धरती से दूरी इस खास खगोलीय घटना का कारण बनेगी। दरअसल, चांद इस वक्त पृथ्वी से सबसे दूर (apogee) होने वाला होगा, इसलिए वह पूरी तरह से सूरज को ढक नहीं सकेगा। इससे पहले वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के ऐस्ट्रोनॉमी स्टूडेंट और फटॉग्रफर कॉलिन लेग ने ऐसा नजारा मई 2013 में अपने कैमरे में कैद की थी।

इस केस में रिंग ऑफ फायर पर धरती वायुमंडल का भी असर पड़ेगा। जब तक चांद और सूरज दोनों सबसे ऊंचे अपवर्तन (High Refraction) तक नहीं पहुंचेंगे, ग्रहण साफ नहीं होगा। इस ग्रहण को अफ्रीका और एशिया में साफ-साफ देखा जा सकेगा। इसके अलावा, दक्षिणपूर्व यूरोप, उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में भी आंशिक ग्रहण दिखाई देगा।

अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA का कहना है कि पृथ्वी से जिन जगहों पर ग्रहण देखा जा सकेगा, वहां से मीलों दूर होने पर भी आसमान साफ रहने पर इसको देखे जाने की संभावना है। हर साल लोग ग्रहण देखने के लिए ट्रैवल भी करते हैं लेकिन इस बार कोरोना वायरस की वजह से ऐसा संभव नहीं हो सकेगा और ज्यादातर लोग ऑनलाइन स्ट्रीमिंग से ही इस नजारे को देखेंगे। इस रविवार के बाद अगले साल 2021 में रिंग ऑफ फायर बनेगा जिसे सिर्फ आर्कटिक से देखा जा सकेगा

यूं तो चांद का ज्यादातर हिस्सा छिप जाएगा लेकिन फिर भी इसे नंगी आंखों से नहीं देखा जाना चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोलर व्यूइंग ग्लासेज (Solar viewing glasses) या टेलिस्कोप-दूरबीन जैसे स्पेशल फिल्टर्स का इस्तेमाल करना चाहिए। सूरज को सीधे देखने से आंखों का पर्दा (Retina) खराब हो सकता है और हमेशा के लिए आंखों की रोशनी जा सकती है।

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