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रिटायर्ड आरएएस अश्विनी शर्मा ऑर्गेनिक खेती में जुटे मित्रपुरा

सवाई माधोपुर एक तरफ जहां युवा सरकारी उच्च पदों पर पहुंचने के लिए दिन रात एक किए हुए हैं तो दूसरी तरफ वर्षों तक सरकारी महकमों में उच्च पदों पर रहे लोग शहरों की चकाचैंध और भागदौड़ भरी जिंदगी से नाता तोड़ रहे हैं। वे अब खुले आसमान तले शुद्ध हवा में सांस लेने की सोच के साथ शहरी आपाधापी से दूर गांवों और खेतों में बस रहे हैं। कोरोनाकाल के बाद तो वैसे भी हर आम और खास भी शहरों से तौबा कर गांवों की तरफ जाना चाह रहे हैं। इनमें ब्यूरोक्रेटस भी शामिल हैं जो आलीशान कोठियों के बजाय खेत-खलिहानों में रमने लगे हैं। सुनी पड़ी गांवों की गलियों और खेतों में इन दिनों एकाएक रौनक लौट आई हैं।

राजस्थान प्रशासनिक सेवा के रिटायर्ड अधिकारी अश्विनी शर्मा पिछले कुछ समय से खेती व गौ पालन में नवाचारों के साथ कृषि क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनाने में जुटे हुए हैं। वे ऑर्गेनिक खेती से मुनाफा भी कमा रहे हैं।

शर्मा ने हल से खेत जोतने, निराई, गुड़ाई इससे पहले कभी नहीं की। ऐसे में शर्मा का मजदूरों की तरह खेत में जुटे दिखाई देना किसी सातवें आश्चर्य से कम नहीं। प्रकृति प्रेम के साथ कृषि क्षेत्र में कुछ नया करने की सोच उन्हें खेतों में खींच लाई वर्ना सिया के राम व कई अन्य धारावाहिको के अभिनेता आशीष शर्मा व राजसमंद सांसद जयपुर की राजकुमारी दीया कुमारी के ओएसडी श्रेयांश के पिता अश्विनी शर्मा को खेतों में पसीना बहाने की कोई आवश्यकता नहीं।

जयपुर से 100 किलोमीटर दूर सवाई माधोपुर जिले में मित्रपुरा के पास एक छोटे से गांव थनेरा में 28 बीघा में स्वर्ण कपिला फार्म हाउस में उनकी पत्नी सरिता भी पति के साथ खेतों की सार संभाल में जुटी हैं।

रिटायर्ड आरएएस अधिकारी अश्विनी शर्मा का जिस क्षेत्र में फार्म हाउस हैं उस इलाके में ज्यादातर किसान परम्परागत फसल ही लेते है, जबकि शर्मा ने एकीकृत खेती को अपना फल, सब्जी, विभिन्न खाद्यान्नों के साथ हरे चारे व औषधीय पौधों से फार्म हाउस को सरसब्ज कर डाला।

बागवानी में उनके फार्म पर अमरूद, अनार, आंवला, बिल, निम्बू, लेहसुआ की तो सघन खेती हैं ही। इसके साथ आम, चीकू, कटहल, जामुन, करौंदा, आदि के भी काफी पेड़ हैं। खरबूजा व तरबूज की तो ऐसी वेरायटी है जिसे देख अन्य किसान इनकी खेती करने लगे हैं। 

सब्जी में तोरिया, घीया, भिंडी, करेला, देशी खीरा, पोदीना, धनियां, गाजर, मूली, मटर, टमाटर सहित कई तरह की सब्जियों की पैदावार हो रही है। बेलदार फसल के लिए छावण का जो क्षेत्र विकसित कर रखा हैं उसमें तो एक से अधिक पैदावार हो ही रही है। उसके साथ गेहूं, सरसो, चना, सौंफ, उडद, चंवला, बाजरा, गंवार, तिल आदि की पैदावार भी भरपूर हो रही हैं। हरे चारे में उनके फार्म हाउस में परंपरागत फसलों वाले हरे चारे के अलावा सेवन, नेपियर, बांस, अरडू, मोरंगा हैं। कई तरह के औषधीय पौधे भी शर्मा के फार्म पर हैं उनमें अश्वगंधा, एलोवेरा, गड़ तुम्बा, तुलसी, नीम गिलोय शामिल हैं। जहां पेड़ की छावं दूर-दूर तक नजर नहीं आती थी उसी जमीं में नीम, शीशम आदि के चार सौ पेड़ खड़े हैं। पानी का लेबल सुधार के जतनों का प्रतिफल भी देखने को मिला। उनके कुएं में 20 से 25 फीट पर पानी है। बिजली खर्च बचाने के लिए सोलर प्लांट लगा हुआ है।

फार्म हाउस पर बनी गौशाला में छोटी और बड़ी 25 गिर नस्ल की गाये है। एक कांकरेज नस्ल की गाय भी है।

ऑर्गेनिक खेती व बागवानी के लिए देशी तरीके से ऑर्गेनिक खाद और कीटनाशक का निर्माण तथा उन्हें उपयोग में लेने के गुर कोई इनसे सीखे। खाद और पेस्टिसाइड तैयार करने की तो उन्होंने देशी प्रयोगशाला ही अपने कृषि फार्म पर बना डाली हैं। उनके यहां बेस्ट डी कम्पोजर, माइक्रो न्यूट्रिन, एंजायन, जीवामृत, फंगीसाइड वर्मी कंपोस्ट, वर्मी बेस्ट, 20 तरह की जड़ी बूंटी वाला पेस्टिसाइड, निम्बोली पेस्टिसाइड आदि खाद व कीटनाशक का न केवल निर्माण हो रहा हैं, बल्कि अधिकतर निर्माण सामग्री भी उनके फार्म व आसपास के इलाके में बहुतायत में उपलब्ध हैं।

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