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लोक अदालत मे 1273 प्रकरणों का निस्तारण

लोक अदालत मे 1273 प्रकरणों का निस्तारण

सवाई माधोपुर, राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सवाई माधोपुर के तत्वाधान मे द्वितीय शनिवार 14 सितम्बर को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया।

राष्ट्रीय लोक अदालत हेतु जिला न्यायक्षेत्र सवाई माधोपुर में कुल 18 बैंचों का गठन किया गया। जिले मे लोक अदालत की भावना से आपसी समझाईश व राजीनामा के माध्यम से कुल 1273 प्रकरणों का निस्तारण किया गया, जिनमे 28279241 रूपये राशि का समझौता हुआ। जिनमे प्रलिटिगेशन स्तर के कुल 249 प्रकरणो का निस्तारण किया गया, जिनमे 13566341/- रूपये राशि का अवार्ड पारित किया गया। जिले के न्यायालयों में लंबित राजीनामा योग्य प्रकरणांे मे से कुल 1024 प्रकरणों मे राजीनामा हुआ, जिनमे 34954694/-राशि का अवार्ड पारित किया गया। राजीनामे के माध्यम से न्यायालयों में लंबित राजीनामा योग्य फौजदारी, दीवानी, पारिवारिक/वैवाहिक, बैंक रिकवरी, 138 एन.आई. एक्ट मामले, पानी, बिजली के मामले, मोटर दुर्घटना क्लेम मामले एवं प्रिलिटिगेशन स्तर के मामलों का आपसी समझाईश एवं राजीनामा के माध्यम से निस्तारण किया गया। 

राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारम्भ अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (जिला एवं सेषन न्यायाधीष, स.मा.) एवं अन्य न्यायिक अधिकारीगण द्वारा सरस्वती माता की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया गया। अध्यक्ष ने उपस्थित अधिवक्ताओं एंव पक्षकारों को लोक अदालत का महत्व बताते हुए कहा कि लोक अदालत के माध्यम से प्रकरणों का अंतिम निस्तारण हो जाता है। जिसमें दोनों पक्षो की सहमति के आधार पर प्रकरणों का निस्तारण होने से दोनो पक्षो में ही सद्भावना बनी रहती है, क्योंकि इसमें किसी भी पक्ष की हार या जीत न होकर दोनो पक्षों की सहमति होने से निस्तारित होने से प्रत्येक पक्ष स्वंय को जीता हुआ महसूस करता है। लोक अदालत में प्रकरणों का आपसी सहमति से निस्तारण होने से प्रकरणों की अपील भी नहीं होती है, साथ ही कोर्ट फीस वापस हो जाती है। कानूनी जटिलताओं से परे लोक अदालत की प्रक्रिया सरल एवं आपसी समझौते पर आधारित होती है। आज के दौर में लोक अदालत एक महापर्व है, जिसमें सभी पक्षकारान को शामिल होकर इसका फायदा उठाना चाहिए।

सचिव जिला प्राधिकरण श्रीमति श्वेता शर्मा ने बताया कि लोक अदालत असल में हमारे देष में विवादों के निपटोर का वैकल्पिक माध्यम है। इसे बोलचाल की भाषा में लोगो की अदालत भी कहते है। इसका उद्देष्य है कि देष कोई नागरिक आर्थिक या किसी अन्य अक्षमताओं के कारण न्याय पाने से वंचित न रह जाये।

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