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शबरी जैसे भक्तों के लिए भगवान स्वयं आते हैदृ स्वामी प्रकाशानंद भीलवाड़ा

शबरी जैसे भक्तों के लिए भगवान स्वयं आते हैदृ स्वामी प्रकाशानंद

भीलवाड़ा- मूलचन्द पेसवानी 

,श्री रामकथा महोत्सव सेवा समिति, ओ सेक्टर के तत्वाधान एवं संत बनवारी शरण जी काठिया बाबा की अध्यक्षता में आयोजित 11वी रामकथा के आठवे दिवस पर स्वामी प्रकाशानंद महाराज ने पांडाल में उपस्थित श्रद्धालुओ को संबोधित करते हुए कहा कि प्रेम करना सीखना हो तो माँ शबरी से सीखिए, राम के इंतजार में जिसने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया, जिनके लिए स्वयं राम भी दौड़े दौड़े आते है। निष्काम प्रेम करना सीखना हो तो शबरी से सीखिए । कथा में हनुमान जी महाराज के पदार्पण के साथ उनके अष्टरूप की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि सीता मैया ने उन्हें अजर अमर होने का वरदान दिया था, इस कारण कलियुग में उनकी महिमा भारी है। माया, जीव और ब्रहम में भेद बताते हुए कहा कि जीव और ब्रह्म के बीच माया ने स्थान ले लिया है जिस कारण जीव और ब्रह्म आपस में मिल नहीं पा रह है, माया रूपी पर्दा हटाने के लिए राम नाम का सहारा लेना पड़ेगा, नाम सुमिरन से ही माया का पर्दा हट सकता है । कथा समिति के अध्यक्ष विष्णु कुमार छीपा ने बताया कि आज कथा की शुरुआत आशुतोष त्रिगुणायत, रामस्वरूप कुमावत, नौरत मल बाफना, मुकेश पीपाडा ने व्यासपीठ का पूजन करके की व कथा के अंत में दुदाधारी मंदिर के महंत श्री गौरीशंकर शास्त्री, पंडित अशोक व्यास, अमर सिंह भंडारी, रतनलाल सेन आदि ने महाआरती कर कथा को विश्राम दिया। कथा में आज सीता हरण, शबरी मिलन, जटायु उद्धार, सुग्रीव मिलन, बाली उद्धार, बालाजी महाराज द्वारा लंका की अशोक वाटिका उजाड़ आदि प्रसंगों का मार्मिक वर्णन किया गया। कथा में कल रामसेतु निर्माण, रामेश्वरम स्थापना, राम-रावण युद्ध, श्री रामराज्याभिषेक आदि प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा ।

संयोजक छगन जैन ने बताया कि कल कथा के अंतिम दिन सुबह 8 बजे से 12 बजे तक विशाल यज्ञ का आयोजन किया जाएगा, जिसमे करीब 5001 नारियल के गोलों की आहुति दी जायेगी । हवन के तत्पश्चात दोपहर 1 से 3.15 बजे तक कथा का महाविश्राम होगा, उसके बाद विशाल विजय जुलुस निकाला जायेगा, जिसमे रामायण की पोथी जी को गंतव्य तक पहुँचाया जाएगा ।

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