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शांति व सुख-समृद्धि स्थापित होगी, विकास के नए द्वार खुलेंगे, दान पुण्य करने से मिलेगा विशेष लाभ

शांति व सुख-समृद्धि स्थापित होगी, विकास के नए द्वार खुलेंगे, दान पुण्य करने से मिलेगा विशेष लाभ

होली पर 499 साल बाद 4 अलग-अलग ग्रहों की चाल..
अबकी बार 499 साल बाद ग्रहों की चाल होली पर्व के साथ देश में समृद्धि व शांति का सहयोग लेकर आ रही है! हिंदी पंचांग में 9 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा सोमवार के दिन होलिका दहन किया जाएगा! दूसरे दिन मंगलवार को होली खेली जाएगी! होली के दिन गुरु शनि का विशेष योग बन रहा है! यानी दोनों ग्रह अपनी अपनी राशि में रहेंगे! पंडित राहुल शर्मा ने बताया कि होली के दिन गुरु में शनि का अपनी-अपनी राशि में आना घर परिवार के साथ ही देश में सुख समृद्धि एवं शांति स्थापित करने वाला संयोग है! दूसरा बड़ा सहयोग सोमवार के दिन होलिका दहन होना है! इस दिन बृहस्पति एवं मंगल भी एक साथ रहेंगे! जो बुद्धिजीवी वर्ग के लिए अच्छा संकेत माना जा रहा है! इस संयोग में मांगलिक कार्य होंगे! समृद्धि व शांति के साथ विकास के रास्ते खुलेंगे!

3 मार्च 1521 को रहा था ऐसा संयोग…
पंडित जी ने बताया कि गुरु और शनि एक साथ सूर्य नक्षत्र में आने से शुभ फलदायक रहेंगे! होली के दिन 9 मार्च को गुरु अपनी धनु राशि में शनि भी अपनी ही राशि मकर में रहेंगे!
इससे पहले इन दोनों ग्रहों का ऐसा योग 3 मार्च 1521 को बना था! तब भी यह दोनों ग्रह अपनी अपनी राशि में ही थे! होली पर शुक्र मेष राशि मे, मंगल और केतु धनु राशि में, सूर्य और बुध कुंभ राशि में, चंद्र सिंह में रहेगा! ग्रह के योगों में होली आने से यह शुभ फल देने वाली रहेगी! यह योग देश में शांति स्थापित करवाने में सफल रहेगा!

राज अचार्य पंडित जी ने बताया कि होली के दिन ज्यादातर भद्रा रहती है! इस बार होलिका दहन स्वार्थ सिद्धि योग में किया जाएगा! पंचांग के अनुसार होलिका दहन के लिए गोधूलि बेला का समय यानी शाम 6:00 से 7:00 तक सब श्रेष्ठ माना गया है! बृहस्पति एवं मंगल की युति बुद्धिजीवी वर्ग के लिए शुभ फलदायक मानी गई है! इससे पहले 3 मार्च से होलाष्टक का आगाज होगा! हिंदी पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से पूर्णिमा तक होलाष्टक रहता है! इस दौरान सभी तरह की शुभ कर्म वर्जित रहते हैं! इन दिनों में पूजा-पाठ और दान पुण्य करने का विशेष महत्व है! इसलिए अधिक से अधिक दान पुण्य करना चाहिए! जिससे साधु संतों के साथ ब्राह्मणों में गरीबों को भोजन कराकर वस्त्र दान कर गायों को हरा चारा खिलाना चाहिए! व पक्षियों को दाना डालने के साथ परिंडे लगाए, पीपल के पेड़ को जल चढ़ाएं! जिस से विशेष लाभ मिलता है और भगवान शिव और माता पार्वती का सभी को आशीर्वाद मिलता है

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