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शाहपुरा ब्र.कु. विश्वविद्यालय केंद्र पर शिव ध्वज के साथ मनाया 84 वीं त्रिमूर्ति शिव जयंती महोत्सव-भीलवाडा

शाहपुरा ब्र.कु. विश्वविद्यालय केंद्र पर शिव ध्वज के साथ मनाया 84 वीं त्रिमूर्ति शिव जयंती महोत्सव 

शिव के दिव्य अवतरण का ही यादगार दिन महाशिवरात्रि-संगीता बहन 

शाहपुरा- मूलचन्द पेसवानी 

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के शाहपुरा स्थित गांधीपुरी केंद्र में शुक्रवार को 84वीं त्रिमूर्ति शिव जयंती महोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की केंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी संगीता बहन ने इस मौके पर गांधीपुरी में इस वर्ष स्थापित नये केंद्र पर पहली बार शिव ध्वज फहराने के बाद कहा कि परमात्मा शिव द्वारा मनुष्य आत्माओं के कल्याणार्थ सत्य ज्ञान दिया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने शिव ध्वज के नीचे खड़े होकर स्वयं पुरूषार्थ से अपनी बुराईयों को त्यागने की प्रतिज्ञा ली। केंद्र पर आज शिव ध्वजारोहण, विशेष प्रवचन के साथ विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों का आह्वान किया गया कि सत्संग में शामिल होने का मौका भी भाग्य से मिलता है। इसलिए जब भी मौका मिले, सत्संग में शामिल होना चाहिए। 

ब्र.कु. संगीता बहन ने कहा कि जब इस धरा पर चारों ओर अज्ञान अन्धकार छाया होता है तथा मनुष्यात्माएं काम, क्रोध, लोभ, मोह एवं अहंकार रूपी विकारों के वशीभूत हो जाती हैं। तब ऐसे अतिधर्मग्लानि के समय पर मनुष्यों को निर्विकारी और पवित्र बनाने के लिए परमात्मा शिव का दिव्य अवतरण इस धरा पर होता है। वास्तव में महाशिवरात्रि शिव के दिव्य अवतरण का ही यादगार दिन है। उन्होंने कहा कि यह पुनीत कर्तव्य ब्रह्मकुमारी संस्थान द्वारा किया जा रहा है। इस संस्थान में सिखाए जा रहे राजयोग के सतत् अभ्यास से मन की वृत्तियॉं शुद्घ होती हैं तथा सभी को आत्मिक रूप में समान दृष्टि से देखने के परिणामस्वरूप समाज में सद्भावना की स्थापना होती है।

ब्र.कु. संगीता बहन ने कहा कि परमात्मा शिव अपने बच्चों को इस समय ईश्वरीय ज्ञान देकर सुख-शांति संपन्न सतयुगी देवी दुनिया की पुनर्स्थापना कर रहे हैं। यह कार्य परमात्मा शिव द्वारा पिछले 84 वर्ष से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस शिवरात्रि पर सभी को नशे से दूर रहने का संदेश प्राप्त करना चाहिए। शिव परमात्मा हमें अज्ञान की निंद्रा से जगाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस समय दुनिया में भौतिक प्रगति बहुत हुई है, लेकिन जीवन मेें सुख और शान्ति कम होती जा रही है। हम सभी चाहते हैं कि यह विश्व सुखमय बने और समाज में सद्भावना हो। लेकिन यह तभी सम्भव है जबकि मनुष्यों के मन में सभी प्राणीमात्र के लिए शुभ भावना और शुभ कामना होगी । यह बड़े ही अफसोस की बात है कि इस दुनिया में इन्जीनियर, डॉक्टर और वकील बनाने के अनगिनत विद्यालय हैं किन्तु इन्सान को अच्छा इन्सान बनाने का एक भी विद्यालय नहीं है।

उन्होंने कहा कि शिवरात्रि से सम्बन्धित रस्म-रिवाजों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने बतलाया कि शिवलिंग पर पानी मिश्रित दूध और दही की धार टपकाने का अभिप्राय है कि हम अपनी बुद्घि का तार सतत् रूप से परमात्मा से जोड़कर रखें, बेलपत्र चढ़ाने का तात्पर्य है कि परमात्मा के प्रति समर्पित भाव रखें तथा अक, धतूरा जैसे सुगन्धहीन और काँटेदार फूल भेंट करने का रहस्य है कि अपनी बुराइयों और विकारों को जो कि कांटों की तरह दुरूख पहुँचाते हैं, परमात्मा को अर्पित कर निर्विकारी और पवित्र बनें। इसी प्रकार सिर्फ एक रात जागने से अविनाशी प्राप्ति नहीं होगी बल्कि अब तो कलियुग रूपी महारात्रि चल रही है, उसमें आत्मा को ज्ञान द्वारा जागृत करना ही सच्चा जागरण है।

इस मौके पर शुक्रवार को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की गांधीपुरी केंद्र पर शिवप्रकाश सोमाणी, रामस्वरूप काबरा, दुर्गाप्रसाद काबरा, ओमप्रकाश मून्दड़ा, राधेश्याम जीनगर, राहुल, अशोक थारवानी, कैलाश सिंह झाड़ावत, पवन पेसवानी, सरोज राठौड़ सहित कई साधक मौजूद रहे।

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