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शाहपुरा में भोर तक चला मंडेला स्मृति कवि सम्मेलन - भीलवाड़ा
शाहपुरा में भोर तक चला मंडेला स्मृति कवि सम्मेलन - भीलवाड़ा

शाहपुरा में भोर तक चला मंडेला स्मृति कवि सम्मेलन – भीलवाड़ा

साहित्य सृजन कला संगम संस्थान शाहपुरा के तत्वावधान में आयोजित 23 वां अखिल भारतीय कवि सम्मेलन हजारों श्रोताओं की उपस्थिति में आज भोर होने के 4 बजे तक चला।
शुरुआत में ऋषभदेव के राजस्थानी भाषा की वागडी बोली के साहित्यकार कवि उपेंद्र अणु को लोक कवि मोहन मंडेला स्मृति लोक साहित्य सम्मान 2019 प्रदान किया गया। हास्य कवि स्वर्गीय सुरेंद्र दुबे के नाम से शुरू किया गया सुरेंद्र दुबे स्मृति सम्मान ओज के सुप्रसिद्ध कवि वेदव्रत वाजपेयी-लखनऊ को प्रदान किया गया। राजस्थान संस्कृत साहित्य अकादमी के निदेशक प्रसिद्ध हास्य कवि संजय झाला को उनकी उपलब्धियों के लिए नागरिक अभिनंदन किया गया। इसके पश्चात इस जन आयोजन में इस वर्ष क्षेत्र में दिवंगत हुए महत्वपूर्ण व्यक्तियों, देश के राजनेताओं, कवियों एवं कलाकारों को सामूहिक श्रद्धांजलि मौन रह कर दी गई।

अतिथि कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामपाल शर्मा, आरसीएम ग्रुप के चेयरमैन त्रिलोकचंद छाबड़ा एवं एसडीएम शाहपुरा सुश्री श्वेता चैहान, उद्योगपति सुशील डांगी, माहेश्वरी समाज के जिलाध्यक्ष दीनदयाल मारू ने मां सरस्वती एवं लोक कवि मोहन मंडेला के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन से किया।

हाड़ौती बोली के गीतकार विष्णु विश्वास ने अपनी सुमधुर सरस्वती वंदना थारा चरणं में म्हारो ध्यान से की। तत्पश्चात हास्य कवि दिनेश बंटी ने अपने चुटीले हास्य व्यंग्य से की उठावने पर बैठने आने वालों की विसंगत टिप्पणियों से श्रोताओं को भरपूर गुदगुदाया। उदयपुर की कवयित्री दीपिका माही ने श्रृंगार के गीत ष्बस्ती-बस्ती बदरा बरसे तरस गए हम सावन में, ऐसे रूठे सजना हमसे, मौसम गया मनावन में सुनाया जिसे सभी ने सराहा। बारां के हाड़ोती गीतकार विष्णु विश्वास ने अपनी मधुर आवाज में एक से बढ़कर एक बेहतरीन गीतों की प्रस्तुति दी उनका गीत ष्गौरी थारो डील इतर की शीशी सौरम सी लपट उडै छै, थारो मन गंगा को पाणी री पाप्यां का पाप झड़े छ।। सहित कई गीत सुनाये जिसे श्रोताओं ने भरपूर दाद दी।

लाफ्टर फेम हास्य कवि दिल्ली के सुनहरी लाल तुरंत ने मौलिक हास्य कविताओं से ऐसा समां बांधा कि श्रोता लोटपोट हो गए। हम तो रोतों को घड़ी भर में हंसा देते हैं, मछुआरों को भी जाल में फंसा देते हैैं। छत टपके तो फव्वारे का मजा लेते हैं, टूटे कमरे में भी बहारों का मजा लेते हैं। जैसे एक से एक बेहतरीन हास्य छंदों से कवि सम्मेलन को हास्य से सराबोर कर दिया। लोक साहित्य सम्मान से नवाजे साहित्यकार उपेंद्र अणु ने ष्या माटी राजस्थानी है, इणरी कौख म जन्मी मीरां महारानी है।ष्सुना कर कार्यक्रम को ऊंचाइयां प्रदान की। हास्य व्यंग्य के उद्भट और समस्या समाधान के कवि निंबाहेड़ा के शांति तूफान ने तो हास्य का तूफान मचा दिया -ग से गणेश सांप्रदायिक, ग से गाय सांप्रदायिक और ग से गधा धर्मनिरपेक्ष हो गया। जैसे कई समाधान हास्य व्यंग्य में प्रस्तुत किये कि श्रोता उछल- उछल कर दाद देने लगे।

जयपुर के संजय झाला ने अपनी हास्य व्यंग्य की रचनाओं डाकुओं का शिष्टमंडल, भ्रष्टाचार आदि पर करारे व्यंग्य किये। उनके विशिष्ट अंदाज ने कार्यक्रम को परवान चढ़ा दिया। संचालन कर रही कवयित्रि डॉक्टर कीर्ति काले-नई दिल्ली ने अपना गीत क्षमा कर दो मेरे सारे अपराध । सुना कर श्रोताओं के मन में रोमांच पैदा कर दिया। दिवंगत हास्य कवि सुरेंद्र दुबे जी का अंतिम समय में लिखा गीत जाने कैसा मौसम उतरा मेरे मन के भीतर बाहर, ना तो घुप्प अंधेरा ही है, ना ही साफ दिखाई देता। सुना कर कवि सम्मेलन को उत्कृष्टता के शिखर पर पहुंचा दिया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. कैलाश मंडेला ने अपनी बहु चर्चित पैरोडी सीबीआई सत्य है, कोर्ट ही शिव है, ईडी सुंदर है, भागो छुप कर बैठो, सम्मन खोट उजागर है, सत्यम शिवम चिदंबरम वर्तमान राजनीति पर पैरोडी सुनाई। उन्होंने लोक कवि श्री मोहन मंडेला का 1971 के पाकिस्तान युद्ध के समय लिखा गया चर्चित ध्वनि गीत बंदूक्या चाले धड़ड़ड़।तोपड़ल्या चाले ठड़ड़ड सुनाया तो उत्साहित श्रोता साथ-साथ बोलने लगे, लोक चितेरे कवि की याद पूरे वातावरण में सजीव हो गई।

लखनऊ के ओज के प्रसिद्ध कवि वेदव्रत वाजपेयी ने राजनीति में परिवारवाद पर अपनी रचना गांधारी ने कब देखा जनता के भूखे पेटों को, चाहत है कुर्सी मिल जाए अपने बेटी बेटों को। एवं युद्धों में कभी नहीं हारे हम, डरते हैं छलछंदों से। हम तो हमेशा हारे हैं घर के ही जयचंदो से। जैसी ओजस्वी रचनाएं सुनाकर कार्यक्रम का बेहतरीन समापन किया। कवि सम्मेलन की विशिष्टता यह रही कि सभी रसों की निष्पत्ति विशुद्ध कविताओं से हुई। कार्यक्रम में संस्थान की ओर से लोक कवि मोहन मंडेला की स्मृति में होने वाले 25वें कवि सम्मेलन को भव्य रूप में आयोजित करने की घोषणा हुई। अंत में परंपरा अनुसार सारे श्रोताओं ने करतल ध्वनि की परंपरा के साथ लोक कवि को श्रद्धांजलि देकर कार्यक्रम का समापन किया गया। संस्था अध्यक्ष जयदेव जोशी ने सभी का आभार ज्ञापित किया।

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